राष्ट्रीय

सौ साल की उम्र पूरी कर चुुके धार्मिक पेड़ों को योगी सरकार करेगी संरक्षित,मांगी हेरिटेज पेड़ों के प्रचार की अनुमति

Khaskhabar/मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौ साल से ज्यादा पुराने पेड़ों की विरासत वृक्ष घोषित करते हुए संरक्षित करने के निर्देश जारी किए हैं। बरेली मंडल में धार्मिक महत्व वाले 71 पेड़ों को संरक्षित करने की लिस्ट शासन को भेजी जा रही है। इनकी निगरानी के लिए हर गांव में जैव विविधता समिति का गठन भी किया जा रहा है।

Khaskhabar/मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 100 साल से ज्यादा पुराने पेड़ों की विरासत वृक्ष घोषित करते हुए संरक्षित करने के निर्देश जारी किए हैं। बरेली मंडल में धार्मिक महत्व वाले 71 पेड़ों को संरक्षित करने की लिस्ट शासन को भेजी जा रही है। इनकी निगरानी के लिए हर गांव में जैव विविधता समिति का गठन भी किया जा रहा है।
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जिले के 18 पौराणिक पेड़ों को विरासत यानी हेरिटेज घोषित कर दिया है। चयनित इन पेड़ों में पीपल के 11, बरगद के पांच और नीम के दो पुराने पेड़ शामिल हैं। वन विभाग ने इन पेड़ों की खूबियां बताने के संबंध में जैव विविधा बोर्ड से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद इन पेड़ों की खूबियां लिखे बोर्ड लगाए जाएंगे। सरकार ने जिन पेड़ों को हेरिटेज घोषित किया है। उनकी उम्र सौ साल से ऊपर है।

कलान इलाके के खुजरी गांव में करीब सौ साल पुराना पीपल

Khaskhabar/मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 100 साल से ज्यादा पुराने पेड़ों की विरासत वृक्ष घोषित करते हुए संरक्षित करने के निर्देश जारी किए हैं। बरेली मंडल में धार्मिक महत्व वाले 71 पेड़ों को संरक्षित करने की लिस्ट शासन को भेजी जा रही है। इनकी निगरानी के लिए हर गांव में जैव विविधता समिति का गठन भी किया जा रहा है।
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भावलखेड़ा ब्लॉक के तियुलक गांव के पूरब दिशा में करीब डेढ़ सौ साल पुराना बरगद का पेड़ खड़ा है। उसके आसपास महोलिया, मुंडी, करसंडा, ददियूरा और बसुलिया गांव हैं। इस पेड़ की हिंदु पूजा करते हैं। वहीं पेड़ के पास एक मजार है। इसकी वजह से दोनों समुदायों के बीच विवाद रहता है। इसके चलते वहां पुलिस की ड्यूटी रहती है। कलान इलाके के खुजरी गांव में करीब सौ साल पुराना पीपल का पेड़ है।

सभी पुराने पेड़ों का विरासत में चयन किया गया

कांट के मरेना गांव में 95 साल, बड़ा के देवकली में 95 साल, खुटार के नरौठा देवीदास गांव में 95 साल, खुदागंज के अकबरपुर में सौ साल, ददरौल के टिकरी में 110 साल, जैतीपुर के सुरजूपुर में 125 साल, निगोही में सौ साल पुराने पीपल के पेड़ हैं। इसी तरह तिलहर के मौजमपुर के 120 साल, बंडा के सुनासिर नाथ मंदिर स्थित 115 साल पुराने पीपल पेड़ है। इन सभी पुराने पेड़ों का विरासत में चयन किया गया है।

डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि पीपल का पेड़ ऑक्सीजन अधिक छोड़ता है। नीम का पेड़ औषधीय है। हेरिटेज घोषित किए गए पेड़ों के संबंध में जैव विविधता बोर्ड से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने के बाद इनकी खुबियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा। हेरिटेज पेड़ों की देखभाल करने के साथ उन पर बोर्ड लगाए जाएंगे।

कमिश्नर कार्यालय समेत 32 जगह पर पेड़ होंगे संरक्षित

शासन से मिले निर्देशों के बाद बरेली में कमिश्नर कार्यालय, कलक्ट्रेट में लगे पेड़ों सहित 32 पेड़ चिह्नित हुए हैं। इसमें सदर तहसील में चार, आंवला में छह, बहेड़ी में पांच पेड़ दस्तावेजों में संरक्षित करने के लिए दर्ज हुए हैं। जिला वन अधिकारी भारत लाल के मुताबिक सभी 32 पेडा़ें की लिस्ट शासन को भेज दी गई है। इनमें सभी धार्मिक महत्व वाले हैं। सबसे ज्यादा संख्या पीपल के पेड़ों की है। बरगद व नीम के पेड़ भी शामिल हैं।

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सेमल, पाकड़, बरगद के छह पेड़ चिह्नित

पीलीभीत में सेमल, पाकड़, बरगद व पीपल के छह ऐसे वृक्ष चिह्नित किए जा चुके हैं, जो सौ साल से ज्यादा पुराने हैं। समाज की विरासत माने गए इन वृक्षों का संरक्षण किया जाएगा। सौ साल पुराना वृृक्ष टनकपुर रोड पर स्थित जनपद न्यायाधीश के सरकारी आवासीय परिसर में भी खड़ा है। उस वृक्ष को भी संरक्षित किया जाएगा।

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