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UAE का अंतरिक्ष यान आज कर सकता है मंगल की कक्षा में प्रवेश,साथ ही तीन देशों के पहुंच रहे हैं अंतरिक्ष यान

Khaskhabar/संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का एक अंतरिक्ष यान होप (HOPE) मंगल ग्रह (Mars) के काफी नजदीक पहुंच गया है और उम्मीद है कि आज ये मंगल की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। ये अंतरिक्ष यान उन तीन रोबोट खोजकर्ताओं में से एक है, जो अगले डेढ़ हफ्तों में लाल ग्रह पर पहुंचने वाले हैं। इसके अलावा एक-एक चीन (China) और अमेरिका (US) के अंतरिक्ष यान भी हैं, जो मंगल ग्रह पहुंचेंगे।

Khaskhabar/संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का एक अंतरिक्ष यान होप (HOPE) मंगल ग्रह (Mars) के काफी नजदीक पहुंच गया है और उम्मीद है कि आज ये मंगल की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। ये अंतरिक्ष यान उन तीन रोबोट खोजकर्ताओं में से एक है, जो अगले डेढ़ हफ्तों में लाल ग्रह पर पहुंचने वाले हैं। इसके अलावा एक-एक चीन
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वहीं इसके पीछे चीन का एक ऑर्बिटर और लैंडर बुधवार को मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला है। यह रोवर के अलग होने तक मंगल का चक्कर काटेगा और एनशिएंट लाइफ के संकेतों को देखने के लिए मई में सतह पर उतरने की कोशिश करेगा।ये ऑर्बिटर, जिसका नाम होप है और जिसे अरबी में अमल कहा जाता है, ने मंगल पर जाने के लिए लगभग सात महीनों में 300 मिलियन मील की यात्रा की। इसे वहां मंगल का पहला ग्लोबल वेदर मैप तैयार करने के लक्ष्य से भेजा गया है।

दुनिया में अब तक अमेरिका ही एक अकेला ऐसा देश है, जो मंगल पर सिर्फ एक, दो या तीन नहीं बल्कि आठ पर सफल लैंडिग कर चुका है। लगभग 45 साल पहले अमेरिका ने वहां पहले बार कदम रखा था। NASA दो लैंडर इनसाइट और क्यूरियोसिटी, अभी भी मंगल की सतह पर काम कर रहे हैं।

Khaskhabar/संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का एक अंतरिक्ष यान होप (HOPE) मंगल ग्रह (Mars) के काफी नजदीक पहुंच गया है और उम्मीद है कि आज ये मंगल की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। ये अंतरिक्ष यान उन तीन रोबोट खोजकर्ताओं में से एक है, जो अगले डेढ़ हफ्तों में लाल ग्रह पर पहुंचने वाले हैं। इसके अलावा एक-एक चीन
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चीन का मंगल मिशन:

तियानवेन-1 मंगल की कक्षा में प्रवेश करने वाले दूसरा मिशन चीन का तियानवेन-1 है। चाइनीज में तियानवेन का अर्थ है- स्वर्ग से सवाल। यह उसका भी पहला स्वतंत्र मंगल अभियान है। इसे यूएई के तीन दिन बाद यानी 23 जुलाई ,2020 को हैइनान प्रांत के वेंचैंग स्पेस लॉन्च सेंटर से भेजा गया था। तियानवेन-1 के भी इसी हफ्ते मंगल की कक्षा में पहुंचने की उम्मीद है। चीन का मंगल मिशन भी लाल ग्रह के वातावरण का पता लगाएगा। लेकिन, इस मिशन का मुख्य हिस्सा मई में पूरा होना है, जब इसके रोवर को मंगल के दक्षिणी हिस्से या यूटोपिया प्लैनिटिया की सतह पर सॉफ्ट-लैंड कराने की योजना है। चीन का यह मिशन चीन के भविष्य की योजना पर आधारित है, जिससे कि वह मंगल से उसकी चट्टान और मिट्टी धरती पर ला सके।

होप यान के नष्‍ट होने का भी खतरा

वैज्ञानिकों के मुताबिक इसमें खतरा यह है कि अगर वे तेजी से जाते हैं तो होप मंगल ग्रह से दूर निकल जाएगा और अगर होप धीमे जाता है तो वह मंगल ग्रह पर नष्‍ट हो जाएगा। इस होप यान लक्ष्य है मंगल का पहला ग्लोबल वेदर मैप भी तैयार करना। ये मिशन इसलिए खास है क्योंकि इससे पहले के रोवर मंगल के चक्कर ऐसे काटते थे कि वह दिन के सीमित वक्त में ही उसके हर हिस्से को मॉनिटर कर पाते थे। इससे अलग होप का ऑर्बिट अंडाकार है जिसे पूरा करने में इस रोवर को 55 घंटे लगेंगे। इसकी वजह से यह मंगल के हिस्सों पर दिन और रात में ज्यादा समय के लिए नजर रख सकेगा। मंगल के एक साल में यह हर हिस्से पर पूरे दिन नजर रखेगा।

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मंगल की धरती पर आजतक अमेरिका ही पहुंच सका

अभी तक अमेरिका ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने मंगल पर सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान उतारा है और उसने यह कमाल आठ बार किया। नासा के दो लैंडर वहां संचालित हो रहे हैं, इनसाइट और क्यूरियोसिटी। छह अन्य अंतरिक्ष यान मंगल की कक्षा से लाल ग्रह की तस्वीरें ले रहे हैं, जिनमें अमेरिका से तीन, यूरोपीय देशों से दो और भारत से एक है। मंगल ग्रह के लिये चीन ने अंतिम प्रयास रूस के सहयोग से किया था, जो 2011 में नाकाम रहा था।

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