This 'ill-fated' government bungalow was again in the discussions as soon as CM Trivendra resigned, the price is 30 crores
राष्ट्रीय

सीएम त्रिवेंद्र के इस्तीफा देते ही फिर चर्चाओं में आया ये ‘मनहूस’ सरकारी आवास,30 करोड़ है कीमत

Khaskhabar/9 मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद मुख्यमंत्री आवास के मनहूस होने की अफवाहें एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. उत्तराखंड की राजनीति के इतिहास को देखते हुए देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास को ‘मनहूस’ माना जाता है. सियासी गलियारे में यह बातें उड़ती रहती हैं कि इसमें रहने वाला मुख्यमंत्री कभी अपना कार्यकाल नहीं पूरा कर पाता है.

Khaskhabar/9 मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद मुख्यमंत्री आवास के मनहूस होने की अफवाहें एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. उत्तराखंड की राजनीति के इतिहास को देखते हुए देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास को
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उत्तराखंड की सियासत में मची उथल-पुथल के बीच मुख्यमंत्री आवास का वास्तुदोष एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। 30 करोड़ रुपये की लागत से बने इस सरकारी आवास में अब तक जितने भी मुख्यमंत्री रहे, वह अपना कार्यकाल पूरा ही नहीं कर पाए। अब त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम इस फेहरिस्त में चौथे स्थान पर है। सीएम के इस्तीफा देते ही इस बंगले का मिथक सत्ता के गलियारों में फिर चर्चा का विषय बन गया।

मुख्यमंत्री आवास में वास्तुदोष की अफवाहों के कारण करीब सभी पूर्व मुख्यमंत्री इसमें रहने से बचते रहे हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत के यहां आने से पूर्व राज्य संपत्ति विभाग ने बंगले को संवारने का काम भी किया था। इस मुख्यमंत्री आवास का निर्माण नारायणदत्त तिवारी के कार्यकाल में शुरू हुआ था, जो भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडू़डी के पहले कार्यकाल में पूरा हुआ। खंडू़ड़ी ही सर्वप्रथम इस आवास में रहे, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें पद से हटना पड़ा था।

नारायण दत्त तिवारी के अलावा कोई नहीं बचा सका 5 साल तक कुर्सी

21 साल पहले नया राज्य बनने से लेकर अब तक जो भी इस प्रदेश का मुख्यमंत्री बना, वह 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका. हालांकि, इस मामले में कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी अपवाद हैं. वो इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने साल 2002 से 2007 तक अपना कार्यकाल पूरा किया. लेकिन जब वे सत्ता में थे, तब तक राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री के लिए कोई भी स्थायी सरकारी आवास नहीं था. बीजापुर गेस्ट हाउस को ही अस्थायी आवास में तब्दील कर दिया गया था.

हरीश रावत भी नहीं रहे थे इस बंगले में

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इस आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास के बजाय राज्य सरकार के एक गेस्ट हाउस में रहा करते थे. हालांकि, जब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तो उन्होंने यह बात साफ तौर पर कही थी कि वह मनहूस कहे जाने वाले इस आधिकारिक बंगले में ही रहेंगे.

ये मुख्यमंत्री भी कार्यकाल पूरा होने के पहले हो गए ‘पूर्व’

मुख्यमंत्री रहते हुए पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने इस बंगले का निर्माण कराया था. लेकिन तब से लेकर अब तक कोई भी मुख्यमंत्री यहां रहते हुए अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया. हरीश रावत ने तो अपने कार्यकाल में यहां कदम तक नहीं रखा. त्रिवेंद्र सिंह रावत आए तो उन्हें लगा कि वे अपना कार्यकाल जरूर पूरा कर लेंगे. लेकिन वह भी इस मिथक से अछूते नहीं रहे. मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, बीएस खंडूरी और विजय बहुगुणा उत्तराखंड के उन्हीं मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं जो इस बंगले में रहे और सत्ता का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए.

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साल 2010 में बना था यह नक्काशीदार बंगला

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास को पारंपरिक पहाड़ी स्टाइल में डिजाइन किया गया है. यह साल 2010 में बना था. 10 एकड़ जमीन में यह बंगला करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बना था. लेकिन मनहूसियत की अफवाहों के चलते यह कई सालों तक खाली रहा.

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