The mission to save the earth was successful, the spacecraft collided with the asteroid
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पृथ्वी को बचाने का मिशन सफल, एस्टोरायड से टकराया स्पेसक्राफ्ट

एस्टेरॉयड से पृथ्वी को बचाने के लिए किया गया नासा का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। मंगलवार को नासा ने पृथ्वी को एस्टेरायड से बचाने के लिए एक टेस्ट किया, जिसके तहत सुबह 4 बजकर 44 मिनट पर डार्ट स्पेसक्राफ्ट डिमॉरफोस नाम के एक छोटे एस्टेरॉयड से सफलतापूर्वक टकराया। यह पहली बार है जब किसी ग्रह रक्षा प्रणाली को पूरा किया गया और बिना किसी बाधा के योजना अनुसार मिशन सफल हुआ।

एस्टेरॉयड से पृथ्वी को बचाने के लिए किया गया नासा का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। मंगलवार को नासा ने पृथ्वी को एस्टेरायड से बचाने के लिए एक टेस्ट किया
Posted by khaskhabar

नासा के लाइवस्ट्रीम में स्पेसक्राफ्ट जैसे ही एस्टेरायड से टकराया तो वैज्ञानिक बेहद खुश हो गए

इसके साथ ही नासा ने एक नया कीर्तिमान रच दिया है। भविष्य में किसी भी एस्टोरॉयड को खत्म करने में इसका फायदा लिया जा सकेगा। नासा के लाइवस्ट्रीम में स्पेसक्राफ्ट जैसे ही एस्टेरायड से टकराया तो वैज्ञानिक बेहद खुश हो गए और तालियां बजाने लगे।

एक छोटे से एस्टेरायड, जिसे हमने देखा नहीं है, उसे इतने शानदार ढंग से हिट करना बड़ी उपलब्धि

डार्ट मिशन के कोर्डिनेशन लीड नैन्सी चाबोट ने कहा कि हम जानते थे कि इसकी तस्वीरें काफी शानदार होंगी, लेकिन ये उम्मीद से भी बढ़कर हैं। उन्होंने कहा कि यह काफी कठिन था। एक छोटे से एस्टेरायड, जिसे हमने देखा नहीं है, उसे इतने शानदार ढंग से हिट करना बड़ी उपलब्धि है।

स्पेस क्राफ्ट की टक्कर से डिमॉरफोस पर असर जरूर पड़ा

नासा डार्ट प्रोजेक्ट के जरिए यह पता लगाना चाहता था कि क्या एस्टेरायड पर स्पेसक्राफ्ट की टक्कर का कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं। इससे उसकी दिशा और रफ्तार पर कोई असर पड़ता है या नहीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि स्पेस क्राफ्ट की टक्कर से डिमॉरफोस पर असर जरूर पड़ा है। उनका मानना है कि इस टक्कर से एस्टेरायड को थोड़ा धक्का लगा होगा और बड़े एस्टेरायड डिडिमोस के चारों ओर उसकी कक्षा सूक्ष्म रूप से बदली होगी।

ग्रहों की रक्षा एक वैश्विक प्रयास है और हमारे ग्रह को बचाना बहुत संभव

पृथ्वी और अंतरिक्ष में टेलीस्कोप इस परिवर्तन का माप लेने जा रहे हैं। नासा लाइवस्ट्रीम के प्रशासक बिल नेल्सन ने कहा, “मेरा मानना ​​​​है कि इस मिशन से हम सीख सकेंगे कि एस्टेरायड से हमारे ग्रह की रक्षा कैसे की जाए। मैं वास्तव में ऑब्सजर्वेटरी में क्या चल रहा है, इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हूं ताकि हमें इस एस्टेरायड की कक्षा में होने वाले परिवर्तनों का पता चल सके। इस मिशन के साथ, हम दिखा रहे हैं कि ग्रहों की रक्षा एक वैश्विक प्रयास है और हमारे ग्रह को बचाना बहुत संभव है।”

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एलआईसीआईएक्यूब, हबल और वेब से टकराव की तस्वीरें भी मिल सकती

इस मिशन से एस्टेरायड की स्थिति में हुए बदलाव की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। आने वाले दिनों में वैज्ञानिक डिडिमोस प्रणाली का अध्ययन करेंगे। इसमें जमीन पर मौजूद ऑब्जरवेटरी के साथ डिमोर्फोस की कक्षा में परिवर्तन और अंतरिक्ष दूरबीनों द्वारा प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। वैज्ञानिकों को इसमें एलआईसीआईएक्यूब, हबल और वेब से टकराव की तस्वीरें भी मिल सकती हैं।

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