S Jaishankar can attend the swearing-in of new President Raisi, India-Iran relations are changing
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नए राष्‍ट्रपति राइसी के शपथ ग्रहण में भाग ले सकते हैं एस जयशंकर,भारत- ईरान के बदल रहे है संबंध

Khaskhabar/अफगानिस्‍तान में बदलते हालात के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर के 5 अगस्त को तेहरान में नवनिर्वाचित ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम राइसी के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करने की संभावना है। भारत और ईरान के बदलते संबंध के बारे में जानकार शख्‍स ने सोमवार को यह जानकारी दी। राइसी को ईरान का कट्टरपंथी नेता माना जाता है। वह सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी हैं। उन्‍होंने जून में भारी बहुमत से राष्ट्रपति चुनाव जीता था। भारत ने पहले ही इस आयोजन के लिए ईरान द्वारा निमंत्रण स्वीकार किया है, जिसमें कई देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।

Khaskhabar/अफगानिस्‍तान में बदलते हालात के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर के 5 अगस्त को तेहरान में नवनिर्वाचित ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम राइसी के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व
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अफगानिस्तान के हालात देख दोनों देशों में बढ़ा संपर्क

संकेत साफ है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान के साथ पिछले तीन वर्षों से ईरान के साथ रिश्तों को लेकर उदासीन रहे भारत का रवैया बदल सकता है। जानकारों के अनुसार, भारत सरकार अपनी तेल कंपनियों को ईरान से क्रूड ऑयल खरीदने की इजाजत देने पर भी विचार कर रही है।

एस जयशंकर ने किया था तेहरान का दौरा

पिछले महीने विदेश मंत्री ने रूस की यात्रा के बीच में ईरान की राजधानी तेहरान में एक ठहराव के दौरान निर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी से मुलाकात की थी। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद बदलते हालात और अपने रणनीतिक हितों पर संभावित खतरे को देखते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले दिनों अपने ईरानी समकक्ष जवाद जरीफ से टेलीफोन पर लंबी बातचीत की थी। अफगानिस्तान में तालिबान के तेज होते हमलों को देखते हुए ईरान की भूमिका मौजूदा परिवेश में अहम हो गई है। ईरान लगातार तालिबान के एक बड़े धड़े के साथ ना सिर्फ संपर्क में है, बल्कि अपने स्तर पर अफगान सरकार और तालिबान के बीच शांति बैठकें भी करवा रहा है।

स जयशंकर ने किया चाबहार बंदरगाह का पूरा समर्थन

जानकारों के अनुसार, तेहरान में विदेश मंत्री जावेद जरीफ के साथ बैठक में जयशंकर ने ईरान में बनाए जा रहे चाबहार पोर्ट को लेकर पूरा समर्थन जताया था। तालिबान के सत्ता में आने की आशंका के मद्देनजर जानकार बताते हैं कि इससे भारत की चाबहार परियोजना की प्रगति प्रभावित हो सकती है। भारत इस पोर्ट को अफगानिस्तान के अंदरूनी हिस्से से रेल और सड़क मार्ग से जोड़ने पर काम कर रहा है। साथ ही भारत की योजना यहां एक विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने की भी है। अफगानिस्तान की अस्थिरता इन निवेश योजनाओं पर असर डाल सकती है, जिसकी चिंता ईरान को भी है।

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तेहरान का संक्षिप्‍त दौरा कर सकते हैं एस जयशंकर

ऊपर बताए गए शख्‍स ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर इब्राहीम राइसी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान का संक्षिप्त दौरा करने वाले हैं। खाड़ी क्षेत्र में ईरान भारत के लिए एक प्रमुख देश रहा है। दोनों देश संयुक्त रूप से दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य एशिया के बीच संपर्क में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पिछले महीने ताशकंद में एक कनेक्टिविटी सम्मेलन में जयशंकर ने शपथ ईरान के चाबहार बंदरगाह को एक प्रमुख क्षेत्रीय पारगमन केंद्र के रूप में पेश किया। ऊर्जा संपन्न देश ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह को भारत, ईरान और अफगानिस्तान द्वारा कनेक्टिविटी और व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया जा रहा है।

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