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राहुल बजाज ने बजाज ऑटो के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा,30 साल की उम्र में बने थे CEO

Khaskhabar/Bajaj Auto Limited ने 29 अप्रैल यानी आज ऐलान किया है कि कंपनी के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (Non-Executive Chairman) राहुल बजाज ने कंपनी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। राहुल बजाज सन 1972 से कंपनी का संचालन कर रहे हैं और पिछले करीब 5 दशकों से बजाज ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अब अपनी बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है।

Khaskhabar/Bajaj Auto Limited ने 29 अप्रैल यानी आज ऐलान किया है कि कंपनी के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (Non-Executive Chairman) राहुल बजाज ने कंपनी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। राहुल बजाज सन 1972 से कंपनी का
Posted by khaskhabar

अस्सी और नब्बे का ये विज्ञापन उस समय के हिंदुस्तान की जीती-जागती तस्वीर

‘हमारा कल हमारा आज, बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर’….कहने को ते ये चेतक स्कूटर बनाने वाली कंपनी बजाज ऑटो का विज्ञापन भर था. लेकिन अस्सी और नब्बे का ये विज्ञापन उस समय के हिंदुस्तान की जीती-जागती तस्वीर पेश करता था. इस स्कूटर को आम लोगों तक पहुंचने वाले राहुल बजाज ने अब बजाज ऑटो के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है.

आपको बता दें कि साल 1972 में बजाज ऑटो ने देश में अपने चेतक स्कूटर को लांच किया. इस स्कूटर ने बाजार में आते ही धूम मचा दी थी और देश के युवाओं की पहली पसंद बन चुका थी. आपको ये जानकार हैरानी होगी कि उस दौर में इस स्कूटर का वेटिंग परियड 4 से 5 साल का था. हालांकि अब कंपनी ने कुछ महीनों पहले चेतक को इलेक्ट्रिक वर्जन के साथ फिर से री-लॉन्च किया है.

कुछ ऐसा था बजाज स्कूटर का क्रेज

हमारा कल हमारा आज, बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर. अस्सी के दशक का ये विज्ञापन उस समय के हिंदुस्तान की जीती-जागती तस्वीर पेश करता है.एक समय ऐसा था जब अस्सी और नब्बे के दशक में मध्यम वर्ग के घरों में स्कूटर को ही शान की सवारी समझा जाता था.दशकों तक स्कूटर भारतीय मध्यम वर्ग का बड़ा सपना रहा है.इन्हीं सपनों को संजोते टीवी पर बजाज इस्तीफा ऑटो के ‘हमारा बजाज’ वाले विज्ञापन हज़ारों लोगों के दिल को छू गए थे. किसी घर में जब बजाज चेतक आता था तो उसे देखने और ‘टेस्ट ड्राइव’ करने वालों की भीड़ उमड़ पड़ती थी.

राहुल बजाज के बारे में जानिए

राहुल बजाज का जन्म 10 जून 1938 को एक मारवाड़ी परिवार में बंगाल प्रेसिडेंसी (आजादी से पहले का पश्चिम बंगाल) में हुआ था. राहुल बजाज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समाजसेवी जमनालाल बजाज के पोते हैं. बचपन से ही व्यवसायिक परिवार से ताल्लूक रखने वाले राहुल बजाज के रगो में भी बिजनेस ही दौड़ता था.स्कूल के दिनों में वो बॉक्सिंग चैंपियन थे. फिर सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकनॉमिक्स में बीए की डिग्री ली. मुंबई यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री लेने के बाद अमेरिका चले गए.

30 साल की उम्र में संभाली बजाज ऑटो की कमान

पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1968 में 30 वर्ष की उम्र में जब राहुल बजाज ने ‘बजाज ऑटो लिमिटेड’ के सीईओ का पद संभाला तो कहा गया कि ये मुकाम हासिल करने वाले वो सबसे युवा भारतीय हैं.जब राहुल बजाज के हाथों में कंपनी की कमान आई तब देश में ‘लाइसेंस राज’ था यानी देश में ऐसी नीतियां लागू थीं जिनके अनुसार बिना सरकार की मर्ज़ी के उद्योगपति कुछ नहीं कर सकते थे.ये व्यापारियों के लिए मुश्किल परिस्थिति थी. उत्पादन की सीमाएं तय थीं. उद्योगपति चाहकर भी मांग के अनुसार पूर्ति नहीं कर सकते थे. उस दौर में ऐसी कहानियां चलती थीं कि किसी ने स्कूटर बुक करवाया तो डिलीवरी कई साल बाद मिली.

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तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट 1,310.3 करोड़ रुपए

इस बीच बजाज ऑटो ने अपने तिमाही नतीजे पेश कर दिए है। मार्च तिमाही में कंपनी का  प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 1.7 फीसदी बढ़कर 1,332.1 करोड़ रुपए रहा।  पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट 1,310.3 करोड़ रुपए था।फिस्कल ईयर 2021 की चौथी तिमाही में कंपनी की आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मार्च तिमाही में कंपनी की आय 26.1 फीसदी बढ़कर 8,596.1 करोड़ रुपये रही है जबकि  पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी की आमदनी 6,815.9 करोड़ रुपए रही थी।

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