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मेडिकल छात्र की मौत को हादसा बता पुलिस ने बंद किया केस,14 महीने के संघर्ष के बाद पिता ने बेटे के ‘हत्यारों’ को खोजा

Khaskhabar/मेडिकल छात्र की मौत मामले को हादसा मानकर पंजाब के लुधियाना में पुलिस ने जांच बंद कर दी। लेकिन छात्र के पिता को पुलिस की यह जांच हजम नहीं हुई। उन्हें खुद अपने बच्चे को न्याय दिलाने की ठानी। 14 माह तक उन्होंने खुद जांच किया। साक्ष्य एकत्र कर पुलिस अधिकारियों के सामने रखे। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर बीती तीन दिसंबर को थाना शिमलापुरी पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। बता दें कि छात्र की हत्या आठ अक्तूबर को दशहरा के दिन हुई थी। शिमलापुरी थाने की पुलिस ने मामले को बंद कर दिया था।

Khaskhabar/मेडिकल छात्र की मौत मामले को हादसा मानकर पंजाब के लुधियाना
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आरोपियों कि पहचान अमनदीप सिंह निवासी बांदर डोर (मोगा), हरसिमरन सिंह निवासी गांव रामा (मोगा), हैरी निवासी संदोड़ (संगरूर), नमन गर्ग निवासी चंडीगढ़, कश्यप निवासी फिल्लौर और सुमित निवासी पटियाला के रूप में हुई है। मामले के एक आरोपी अज्ञात है। सभी आरोपी मृतक दया सिंह के दोस्त हैं और पीजी में रहते थे। साथ ही दया सिंह के घर भी आते-जाते थे। आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इससे हत्या करने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।

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सीसीटीवी फुटेज खंगाल एकत्र किए साक्ष्य

बलविंदर सिंह के मुताबिक पुलिस के रवैये को देखते उन्होंने खुद जांच करने की ठानी। उन्होंने नहर के किनारे के लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। एक फुटेज में रात 10 बजे तीन मोटरसाइकिल व एक स्कूटर पर सभी आरोपी जाते हुए नजर आए। स्कूटर नमन गर्ग चला रहा था, उसके पीछे उनका बेटा दया सिंह बैठा था। 

यह वही स्कूटी है, जो दया सिंह के शव के पास मिली थी। वह फुटेज लेकर पुलिस के पास गए। पुलिस ने उनकी एक न सुनी और उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि आरोपी अपने घरों में थे। इसके बाद वह पुलिस कमिश्नर और डीजीपी के पास गए। उन्होंने सारे सुबूत अधिकारियों के सामने रखे। इसमें साफ दिख रहा है कि आरोपी हत्या की रात दया सिंह के साथ थे। अधिकारियों के निर्देश पर थाना शिमलापुरी पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्जकर लिया है।

घर में बतौर पेइंग गेस्ट रह रहा था

ASI जगतार सिंह ने बताया कि जगरांव के गांव रणधीर गढ़ निवासी बलविंदर सिंह का बेटा दया सिंह मेडिकल का स्टूडेंट था। वह लुधियाना के ईशर नगर इलाके में एक घर में बतौर पेइंग गेस्ट रह रहा था। इसी घर में मेडिकल के कुछ अन्य स्टूडेंट भी रहते थे, जो अंतिम वर्ष के छात्र थे। 9 अक्तूबर 2019 की सुबह दया सिंह का शव संदिग्ध हालात में बरोटा रोड पर नहर किनारे पड़ा मिला। शव के पास एक स्कूटर भी पड़ा था। पुलिस टीम ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमार्टम में मौत की कोई वजह नहीं बताई गई और हादसा करार देते धारा 174 के तहत कार्रवाई कर दी।

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मेडिकल छात्र:दशहरे वाले दिन लड़के शहर में नहीं थे

बलविंदर सिंह सभी लड़कों के चेहरे पहचानते थे, क्योंकि वे कई बार घर आ चुके थे। उन्होंने जब पुलिस को यह फुटेज दिखाई तो पुलिस वालों ने यह कहकर भगा दिया कि दशहरे वाले दिन लड़के शहर में नहीं थे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर को भी शिकायत दी, मगर वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अंत में उन्होंने DGP से मिलकर बात की और मामले में कार्रवाई करते की गुहार लगाई।DGP के आदेश पर मामले की नए सिरे से जांच पड़ताल हुई और करीब 10 महीने बाद पुलिस ने सातों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। अब पुलिस आरोपियों की गिरफ्तार में जुटी हुई है।

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