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नार्वे से आई हैरान करने वाली खबर वैक्सीन लगने के बाद 23 लोगों की मौत, सवालों में फाइजर वैक्सीन

Khaskhabar/विश्व के कई देशों में कोरोना के खिलाफ जंग में वैक्सीन का तेजी से इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन नार्वे से हैरान करने वाली खबर आई है। वहां 27 दिसंबर से टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। अब तक 30 हजार से ज्यादा लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। लेकिन वैक्सीन लगाने के बाद अब तक 23 लोगों की मौत हो गई है। इससे फाइजर का टीका सवालों के घेरे में है। 

Khaskhabar/विश्व के कई देशों में कोरोना के खिलाफ जंग में वैक्सीन का तेजी से इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन नार्वे से हैरान करने वाली खबर आई है। वहां 27 दिसंबर से टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। अब तक 30 हजार से ज्यादा लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। लेकिन वैक्सीन लगाने के बाद अब तक 23 लोगों की मौत हो गई है। इससे फाइजर का टीका सवालों के घेरे में है।
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33 हजार लोगों को लगाई गई वैक्सीन

नॉर्वे में 26 दिसंबर 2020 से वैक्‍सीन लगाने का काम शुरू किया गया था. अब तक वहांं 33 हजार लोगों को कोरोना वायरस वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है. बता दें कि नार्वे में इस बात की पहले ही घोषणा की जा चुकी थी कि कोरोना वैक्‍सीन के साइड इफेक्‍ट होंगे.

रूसी समाचार एजेंसी स्‍पूतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक नार्वे की मेडिसिन एजेंसी के मेडिकल डायरेक्‍टर स्टीनर मैडसेन ने कहा,“यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इन टीकों में बहुत कम जोखिम होता है, इन 13 मौतों में नौ गंभीर साइड इफेक्‍ट और 7 कम गंभीर साइड इफेक्‍ट के मामले हैं. डॉक्टरों को अब सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए कि किसे टीका लगाया जाना चाहिए.”

Khaskhabar/विश्व के कई देशों में कोरोना के खिलाफ जंग में वैक्सीन का तेजी से इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन नार्वे से हैरान करने वाली खबर आई है। वहां 27 दिसंबर से टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। अब तक 30 हजार से ज्यादा लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। लेकिन वैक्सीन लगाने के बाद अब तक 23 लोगों की मौत हो गई है। इससे फाइजर का टीका सवालों के घेरे में है।
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फार्मास्युटिकल फर्म फाइजर ने कहा कि उन्हें “इन मौतों के बारे में पता है”. वहीं कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, “नॉर्वे के अधिकारियों ने नर्सिंग होम में रह रहे लोगों को टीकाकरण के लिए प्राथमिकता दी थी, जिनमें से ज्यादातर बहुत बुजुर्ग थे और कुछ पहले से ही बीमार थे.मैडसेन ने कहा कि जिन लोगों के मौत की जांच की गई है, उनमें से कमजोर, बुजुर्ग लोग थे जो ओल्ड एज होम नर्सिंग होम में रहते थे.

पहले डोज के बाद मौत

जिन 23 लोगों की मौत हुई है, उन्हें वैक्सीन का पहला डोज ही दिया गया था। इसके बाद उनकी तबीयत सुधरने की बजाए बिगड़ती चली गई। नार्वे सरकार का कहना है कि बीमार व बुजुर्गों के लिए कोरोना टीकाकरण काफी जोखिम भरा है। यह भी कहा जा रहा है कि मृतकों में 13 लोग ऐसे हैं, जिनकी मौत वैक्सीन के कारण हुई। अन्य लोगों की मौत के कारणों की जांच जारी है। 

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बुजुर्गों पर भारी पड़ा दुष्प्रभाव

नार्वे के लोक स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार सामान्य दुष्प्रभाव भी बुजुर्गों व बीमारों पर भारी पड़ा है। अब तक वैक्क्सीन के दुष्प्रभाव के 29 मामले सामने आ चुके हैं। मृतकों में 80 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग व्यक्ति ज्यादा हैं। कुछ मृतक तो 90 साल की उम्र भी पार कर चुके थे। कुछ लोगों को टीके के बाद बुखार जैसी समस्या हुई और वह गंभीर बीमारी में बदल गई, जिससे उनकी मौत हो गई। 

चीनी विशेषज्ञ फाइजर के टीके के खिलाफ 

उधर, कोरोना वायरस के टीकों को लेकर चीनी विशेषज्ञों की राय सामने आई है। उनका दावा है कि फाइजर का टीका नहीं लगवाया जाना चाहिए। उन्होंने नार्वे व अन्य देशों से कहा है कि यह टीका बुजुर्गों का नहीं लगाया जाना चाहिए। 

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