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NASA:जब लाल ग्रह मंगल धरती के होगा करीब, जानिए कितनी बजे से देख पाएंगे ये दुर्लभ संयोग

Khaskhabar/NASA:प्लेनेटरी सोसाइटी ऑफ इंडिया के निदेशक एन.रघुनंदन कुमार ने बताया कि यह खगोलीय घटना 26 महीने के बाद होने वाली ‘मार्स अपोजिशन टू सन’ नामक खगोलिय स्थिति के कारण हो रही है।खगोल शास्त्र में रुचि रखने वालों के लिए आज का दिन बहुत खास होने वाला है। 6 अक्टूबर को लाल ग्रह के नाम से मशहूर मंगल धरती के करीब पहुंचेगा। इस दौरान पृथ्वी से इसकी दूरी 62.1 मिलियन किमी रह जाएगी।

Khaskhabar/NASA:प्लेनेटरी सोसाइटी ऑफ इंडिया के निदेशक एन.रघुनंदन कुमार ने बताया
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सामान्य तौर पर यह दूरी 63.306 मिलियन किमी रहती है। इस सदी में तीसरी बार यह दुर्लभ संयोग बन रहा है जब लाल ग्रह हमारे करीब से गुजर रहा है।इस विचित्र खगोलीय घटना में मगंल और सूर्य एक दूसरे के विपरित होंगे। पृथ्वी के दृष्टि से यह तीनों ग्रह एक सीधी रेखा पर आ जाएंगे। यह दूबीन से देखा जा सकता है। इसे शाम 7 बजे से देखा जा सकता है।विज्ञान शोध संस्थान के खगोल विज्ञानी डॉ. शशिभूषण पांडे ने बताया, सौरमंडल में मंगल ही एक ग्रह है, जिसपर इन्सानी बस्ती बसाई जा सकती है।

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NASA:भारत समेत दुनिया के अन्य देशों की दिलचस्पी

इस कारण भारत समेत दुनिया के अन्य देशों की दिलचस्पी मंगल के प्रति अधिक है। इन दिनों मंगल (Mars) हमारे करीब है तो इसके प्रति उत्सुकता का बढ़ना भी लाजमी है। इसके बाद मंगल (Mars) साल 2035 में धरती के करीब से गुजरेगा।Mars के नजदीक आने पर विज्ञानियों को मिशन पूरा करने का अनुकूल समय मिलता है। इन दिनों वह पृथ्वी के पीछे की तरफ है तो यह दूरी सिमटकर 62.1 मिलियन किमी रह गई है। ऐसे में विज्ञानियों के अभियान पूरे होने की उम्मीद है।

NASA:जानिए कितने समान हैं मंगल और पृथ्वी

डॉ. पांडे के मुताबिक, Mars और पृथ्वी के बीच कई समानताएं हैं। इसकी सतह पृथ्वी के समान ठोस है। रेगिस्तान भी हैं। ऊंचे पर्वत हैं और ऋतुएं भी एक समान, मगर पृथ्वी की तुलना में लंबी हैं। इसके अतिरिक्त ज्वालामुखी के चिह्न भी मंगल की धरती पर मिलते हैं। पृथ्वी की तरह इसके उत्तरी गोलार्द्ध में जब ठंड पड़ती है तो दक्षिणी गोलार्द्ध में गर्मी होती है। Mars पर कभी विशाल सागर हुआ करते थे और नदियां बहा करती थीं।

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मंगल का अकूत पानी कहां चला गया, यह रहस्य आज भी बरकरार है। Mars और पृथ्वी के बीच एक बड़ा अंतर दिनों का है। Mars का एक साल पृथ्वी से लगभग दोगुना 687 दिनों का होता है। इसकी कक्षा पृथ्वी से बाहर होने के कारण उसे सूर्य का एक चक्कर लगाने में लंबा समय तय करना होता है। समानता को देखें तो इनकी कक्षा चपटी है और अपने अक्ष पर दोनों का झुकाव भी लगभग एक समान है।

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