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राष्ट्रीय

केरल के उच्‍च शिक्षा मंत्री केटी जलील ने दिया इस्‍तीफा,सत्ता के दुरुपयोग का है आरोप

Khaskhabar/केरल के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील ने पी विजयन कैबिनेट से मंगलवार को इस्तीफा दे दिया. इससे कुछ दिन पहले ही राज्य लोकायुक्त ने कहा था कि जलील ने अपने एक रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए लोक सेवक के तौर पर अपने पद का ‘दुरुपयोग’ किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि जलील ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को इस्तीफा भेज दिया है. मंत्री ने फेसबुक पर घटनाक्रम की पुष्टि की है.

Khaskhabar/केरल के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील ने पी विजयन कैबिनेट से मंगलवार को इस्तीफा दे दिया. इससे कुछ दिन पहले ही राज्य लोकायुक्त ने कहा था कि जलील ने अपने एक रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए लोक सेवक के तौर पर अपने
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शिक्षा मंत्री के खिलाफ सत्ता के दुरुपयोग, लाभ पहुंचाने और भाई-भतीजावाद के आरोप

लोकायुक्त की एक खंडपीठ ने जलील के खिलाफ शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी और कहा था कि मंत्री को पद पर बना नहीं रहना चाहिए. पीठ ने कहा था कि मंत्री के खिलाफ सत्ता के दुरुपयोग, लाभ पहुंचाने और भाई-भतीजावाद के आरोप साबित होते हैं. लोकायुक्त का फैसला मुस्लिम यूथ लीग के नेता की तरफ से 2018 में की गई शिकायत पर आया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि जलील के रिश्ते के भाई अदीब को केरल राज्य अल्पसंख्यक विकास वित्त निगम का महाप्रबंधक नियुक्त करने में नियमों की अनदेखी की गई है.अदीब को जब नियुक्त किया गया था तब वह एक निजी बैंक के प्रबंधक थे.

सरकारी खजाने को एक पैसा भी नुकसान पहुंचाया

उन्होंने लिखा, ‘मैं एक लोक सेवक हूं, जिसे पिछले दो वर्षों से मीडिया ने शिकार बनाया. ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि मैंने चोरी की थी, न तो मैं भ्रष्ट था और न ही मैंने अनुपातहीन संपत्ति बनाई थी. ऐसा इसलिए नहीं था क्योंकि मैंने सरकारी खजाने को एक पैसा भी नुकसान पहुंचाया था.’बता दें कि मुस्लिम यूथ लीग ने दो नवंबर 2018 को आरोप लगाया था कि नियमों का उल्लंघन कर अदीब के टी को केरल राज्य अल्पसंख्यक विकास वित्त निगम का महाप्रबंधक नियुक्त किया गया था जोकि जलील के रिश्तेदार हैं.

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प्रदेश सरकार ने किया समर्थन

वहीं कुछ दिन पहले प्रदेश के कानून मंत्री एके बालन ने शनिवार को कहा था कि जलील तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उनके पास कई कानूनी विकल्प हैं और वह लोकायुक्त के फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं.बालन ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास लोकायुक्त की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने के लिए तीन महीने का वक्त है. जो लोग उनका तत्काल इस्तीफा मांग रहे हैं उन्हें यह पता होना चाहिए कि प्रदेश में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है। क्या किसी ने अभी तक इस्तीफा बस इस वजह से दिया है क्योंकि निचली अदालत ने कुछ कह दिया.

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