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भारत ने UN में जताई चिंता, सीरिया में शामिल भाड़े के लड़ाके अन्य देशों के लिए भी खतरा

Khaskhabar/भारत ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सीरिया (Syria) में संघर्ष में शामिल विदेशी लड़ाके भाड़े के सैनिक के रूप में अन्य स्थानों पर चले गए हैं. ऐसे में नई दिल्ली ने रेखांकित किया कि पश्चिम एशियाई देश के हितों के लिए वह सुरक्षा परिषद में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति (TS Tirumurti) ने बुधवार को सीरिया पर सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग में बोलते हुए परिषद को याद दिलाया कि सीरियाई संघर्ष पर पहला अध्यक्ष का बयान भारत के सुरक्षा परिषद के 15 देशों की अध्यक्षता में अगस्त 2011 में अपनाया गया था.

Khaskhabar/भारत ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सीरिया (Syria) में संघर्ष में शामिल विदेशी लड़ाके भाड़े के सैनिक के रूप में अन्य स्थानों पर चले गए हैं. ऐसे में नई दिल्ली ने रेखांकित किया कि पश्चिम एशियाई देश के हितों के लिए वह सुरक्षा परिषद में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस गुरुमूर्ति ने सुरक्षा परिषद में कहा कि भारत इस मंच पर अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने सीरिया के मुद्दे पर हुई बैठक में याद दिलाया कि भारत की अध्यक्षता में ही अगस्त 2011 में सीरिया संघर्ष के मुद्दे पर पहली बार वक्तव्य जारी किया गया था। उसके बाद दिसंबर 2012 में सीरिया पर तीन प्रस्ताव स्वीकार किए गए थे। इन तीनों में से किसी में भी लागू करने और आतंकवाद के लिहाज से कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है।

तिरुमूर्ति ने कहा कि आठ वर्ष बाद हम सुरक्षा परिषद में नई शुरूआत कर रहे हैं, अभी भी हम देख रहे हैं कि सीरिया की समस्या दूर होती दिखाई नहीं दे रही है। राजनीतिक प्रक्रिया भी अभी शुरू नहीं हो पाई है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने चिंता जताई कि समस्या का हल न होने के कारण सीरिया का आतंकवाद अन्य स्थानों पर, यहां तक कि अफ्रीका तक फैल रहा है। सीरिया के भाड़े के लड़ाके अन्य स्थानों पर अपने ठिकाने बना रहे हैं।

Khaskhabar/भारत ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सीरिया (Syria) में संघर्ष में शामिल विदेशी लड़ाके भाड़े के सैनिक के रूप में अन्य स्थानों पर चले गए हैं. ऐसे में नई दिल्ली ने रेखांकित किया कि पश्चिम एशियाई देश के हितों के लिए वह सुरक्षा परिषद में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
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आशा है जल्द खत्म होगा सीरिया का संकट

तिरुमूर्ति ने चिंता जताई कि सीरिया से निकलने वाला आतंकवाद अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक भी फैल गया है. उन्होंने कहा, सीरियाई संघर्ष में शामिल विदेशी लड़ाके भाड़े के सैनिकों के रूप में अन्य स्थानों पर चले गए हैं. कोविड-19 महामारी से मानवीय स्थिति और खराब हो गई है. हम आशा करते हैं कि सीरिया में संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और सीरया में पुनर्निर्माण शुरू हो जाएगा, ताकि सीरिया अरब दुनिया में अपनी ऐतिहासिक भूमिका को फिर से स्थापित कर सके.

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भारत ने कोरोना से लड़ने के लिए भेजी दवाइयां

सीरिया में संकट की शुरुआत 2011 में शुरू हुई थी. भारत ने सीरिया को सरकार और द्विपक्षीय तरीके से 12 मिलियन डॉलर (84 करोड़ रुपये) की मानवीय सहायता पहुंचाई है. भारत ने एक बायो-टेक पार्क और एक आईटी केंद्र भी स्थापित किया है और इस्पात और बिजली क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए 265 मिलियन डॉलर का ऋण दिया है. कोरोना महामारी से लड़ने में सीरिया की मदद के लिए भारत ने 10 मीट्रिक टन दवाइयों को दमिश्क भी भेजा था.

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