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राष्ट्रीय

हरियाणा में अब सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से होगी वसूली,नुकसान भरपाई विधेयक पर राज्यपाल की मुहर

Khaskhabar/हरियाणा में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से अब नए कानून के तहत वसूली हो सकेगी। साथ ही हर्जाना राशि नहीं दिए जाने पर उसकी संपत्ति कुर्क की जा सकेगी। क्षति वसूली विधेयक को विधानसभा के बाद अब राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने भी मंजूरी दे दी है। गुरुवार को राज्यपाल ने हरियाणा लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान क्षति वसूली विधेयक, 2021 को मंजूरी दी। 

Khaskhabar/हरियाणा में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से अब नए कानून के तहत वसूली हो सकेगी। साथ ही हर्जाना राशि नहीं दिए जाने पर उसकी संपत्ति कुर्क की जा सकेगी। क्षति वसूली विधेयक को विधानसभा के बाद अब राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने भी मंजूरी दे दी है।

हरियाणा सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विसेज के एक अधिकारी द्वारा की जाएगी

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि नुकसान की मुआवजे के आवेदन पर निर्णय लेने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक या एक से अधिक दावा अधिकरण (क्लेम ट्रिब्यूनल) का गठन करेगी। क्लेम ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता हरियाणा सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विसेज के एक अधिकारी द्वारा की जाएगी, जिसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से नामित किया जाएगा और इसमें दो या दो से अधिक सदस्य हो सकते हैं। 

हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में पारित हरियाणा लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान क्षति वसूली विधेयक, 2021 को राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने मंजूरी दे दी है। आंदोलनों के दौरान हुए नुकसान के मुआवजे के आवेदन पर फैसला लेने के लिए प्रदेश सरकार एक या एक से अधिक दावा अधिकरण (क्लेम ट्रिब्यूनल) का गठन करेगी।

विधानसभा में पारित हरियाणा लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान क्षति वसूली विधेयक को मिली मंजूरी

ट्रिब्यूनल के अन्य सदस्य राज्य सरकार के अधिकारियों में से होंगे, जो अतिरिक्त उपायुक्त के रैंक से नीचे नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि ट्रिब्यूनल देयता का निर्धारण करेगा, उसके पास भेजे गए मुआवजे के दावों का आंकलन करेगा और मुआवजा का मौद्रिक मूल्य निर्धारित करेगा। उसके बाद, उससे संबंधित या उसके अतिरिक्त उपयुक्त मुआवजे का अवार्ड करेगा। गौरतलब है कि बजट सत्र में सरकार की ओर से विधानसभा में यह विधेयक पेश किया गया था। कांग्रेस ने इसका विरोध किया था, संख्या बल पर इसे पारित किया गया था।

क्लेम ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता हरियाणा सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विसेज के एक अधिकारी द्वारा की जाएगी। इसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से नामित किया जाएगा। क्लेम ट्रिब्यूनल में दो या दो से अधिक सदस्य हो सकते हैं। ट्रिब्यूनल के अन्य सदस्य राज्य सरकार के अधिकारियों में से होंगे, जो अतिरिक्त उपायुक्त के रैंक से नीचे नहीं होंगे। ट्रिब्यूनल नुकसान के मामलों में देयता का निर्धारण करेगा। साथ ही उसके पास भेजे गए मुआवजे के दावों का आंकलन करेगा और मुआवजा निर्धारित करेगा। उसके बाद मुआवजे का अवार्ड किया जाएगा।

पंचायत चुनाव के लिए सरकार ने हाई कोर्ट से मांगा दो महीने का समय

हरियाणा में पंचायत चुनाव कराने के लिए निर्देश देने की मांग की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान बेंच ने तय किया कि पंचायत चुनाव से संबंधित सभी याचिका पर एक साथ सुनवाई की जाए। हरियाणा राज्य चुनाव आयोग के वकील अनिरूद सिंह ने बताया कि पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने राज्य चुनाव आयोग को 22 मार्च को एक पत्र लिख कर वार्डबंदी व आरक्षण तय करने के लिए दो महीने और उसके बाद अन्य तैयारी के लिए एक महीने का समय लगने की बात कही है।

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प्रशासन या स्व-शासन के मॉडल का एक अनिवार्य हिस्सा

सरकार ने संविधान व जनादेश के खिलाफ प्रशासक नियुक्त कर दिए।हाई कोर्ट को जानकारी दी गई कि ग्राम पंचायत स्थानीय प्रशासन या स्व-शासन के मॉडल का एक अनिवार्य हिस्सा है। निर्धारित समय के भीतर चुनाव न कराने और राज्य द्वारा प्रशासक नियुक्त करने के आदेश सरकार की मनमानी को दिखाता है।

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