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Children’s day:पंडित नेहरू की 132वीं जयंती पर शांतिवन जाकर राहुल ने दी पुष्पांजलि,पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

Khaskhabar/Children’s day:देश के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pandit Jawahar Lal Nehru) की आज 132वीं जयंती है। इस मौके पर देश आज उन्हें याद कर रहा है।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मौके पर उनकी समाधि स्थल शांतिवन जाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की. उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “भारत अपने पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती मना रहा है. पंडित नेहरू विशाल दूरदर्शी सोच वाले इंसान थे जिन्होंने भाईचारे, समतावाद और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ देश की नींव रखी. इन मूल्यों के संरक्षण के लिए हमें प्रयास करना चाहिए.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने उन्हें याद करते हुए इस मौके पर ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम ने लिखा है, “देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू को उनकी जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि..”

14 नवंबर को ही क्यों मनाया जाता है Children’s Day?

Khaskhabar/Children's day:देश के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी
Posted by khaskhabar

बता दें कि इस दिन को बाल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। चूंकि पंडित नेहरू को बच्चों से बहुत स्नेह था, बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कहा करते थे, इसलिए उनकी जयंती पर बाल दिवस मनाया जाता है। पंडित नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ थी।पंडित नेहरू के निधन के बाद 1964 से उनकी जयंती पर ही बाल दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई थी। उससे पहले 20 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता था।

पिता पेशे से वकील थे

1947 में देश के आजाद होने पर पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे।17 वर्षों तक यानी 1964 तक जीवनपर्यन्त (मृत्यु तक) वो देश के प्रधानमंत्री बने रहे।पंडित नेहरू बच्चों से बेहद प्यार करते थे इसलिए उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में चुना गया।पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर पर निजी शिक्षकों से प्राप्त की। उनके पिता का नाम मोतीलाल नेहरू था, जो एक धनी परिवार के थे और माता का नाम स्वरूपरानी था। पिता पेशे से वकील थे।

जवाहरलाल नेहरू उनके इकलौते पुत्र थे और 3 पुत्रियां थीं

1912 में भारत लौटने के बाद वे सीधे राजनीति से जुड़ गए। यहां तक कि छात्र जीवन के दौरान भी वे विदेशी हुकूमत के अधीन देशों के स्वतंत्रता संघर्ष में रुचि रखते थे। उन्होंने आयरलैंड में हुए सिनफेन आंदोलन में गहरी रुचि ली थी। उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनिवार्य रूप से शामिल होना पड़ा।

दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला

जवाहरलाल नेहरू को दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पूरी की थी। उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की। हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरूजी ने बार-एट-लॉ की उपाधि ग्रहण की और वे बार में बुलाए गए।

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Children’s day:नेहरू का योगदान

पंडित नेहरू शुरू से ही गांधीजी से प्रभावित रहे और 1912 में कांग्रेस से जुड़े। 1920 के प्रतापगढ़ के पहले किसान मोर्चे को संगठित करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। 1928 में लखनऊ में साइमन कमीशन के विरोध में नेहरू घायल हुए और 1930 के नमक आंदोलन में गिरफ्तार हुए। उन्होंने 6 माह जेल काटी। 1935 में अलमोड़ा जेल में ‘आत्मकथा’ लिखी। उन्होंने कुल 9 बार जेल यात्राएं कीं। उन्होंने विश्वभ्रमण किया और अंतरराष्ट्रीय नायक के रूप में पहचाने गए।

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