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राष्ट्रीय

माउंटबेटन की डायरी को सावर्जनिक करने से UK का इनकार,नेहरू-एडविना-भारत को लेकर राज खुलने का डर!

Khaskhabar/ब्रिटेन की सरकार ने एक बार फिर भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन और उनकी पत्नी एडविना माउंटबेटन की डायरियों और खतों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। ब्रिटिश लेखक एंड्र्यू लोवनी चार साल से इन्हें पाने की कोशिश कोशिश में जुटे हैं और ढाई लाख पाउंड खर्च कर चुके हैं। लेकिन एक बार फिर उन्हें नाकामी हाथ लगी है। ब्रिटिश कैबिनेट और साउथहैम्पटन यूनिवर्सिटी ने उनकी अपील खारिज कर दी है।

Khaskhabar/ब्रिटेन की सरकार ने एक बार फिर भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन और उनकी पत्नी एडविना माउंटबेटन की डायरियों और खतों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। ब्रिटिश लेखक एंड्र्यू
Posted by khaskhabar

लेखक एंड्रयू लोवनी का मानना है कि माउंटबेटन की डायरी से भारत-पाकिस्तान बंटवारे और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू-एडविना के रिश्तों को लेकर कई खुलासे हो सकते हैं।

भारत के विभाजन और एडविना के रिश्तों को लेकर कई तरह के राज खुल सकते

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। लेखक का मानना है कि डायरी और खतों से भारत के विभाजन और एडविना के रिश्तों को लेकर कई तरह के राज खुल सकते हैं, इसलिए ब्रिटिश सरकार इन्हें सार्वजनिक नहीं कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉर्ड माउंटबेटन की डायरी और ए‍डविना के कुछ पत्रों को 2010 में  ‘देश के लिए सुरक्षित’ कर दिया गया था। इसे साउथहैम्पटन यूनिवर्सिटी ने हासिल करके अपने अर्काइव में रखा है।

माउटबेटन की डायरी नहीं होगी सार्वजनिक

गार्डियन न्यूजपेपर के मुताबिक साल 2010 में लॉर्ड माउंटबेटन की डायरी और कुछ चिट्टियों को ब्रिटिश सरकार ने सुरक्षित अपने पास रख लिया था। माउंटबेटन की डायरी और चिट्ठियों को ब्रिटेन की साउथहैंपटन यूनिवर्सिटी ने ब्रॉडलैंड आर्काइव के लिए 2.8 मिलियन पाउंड में खरीद लिया था। डायरी और चिट्ठियों को खरीदने के लिए यूनिवर्सिटी को कई लोगों ने चंदा दिया था। हालांकि, उस वक्त यूनिवर्सिटी ने कहा था कि वो इस बात को सुनिश्चित करेगा तमाम दस्तावेज लोगों की पहुंच में हो।

लोवनी 2017 से इन डायरी और खतों को पाने के लिए कोशिश

2017 में माउंटबेटन पर किताब लिखने वाले लेखक लोवनी 2017 से इन डायरी और खतों को पाने के लिए कोशिश में जुटे हैं। सूचना की स्वतंत्रता (FOI) के तहत अपील और सूचना आयुक्त कार्यालय की ओर से इन्हें सार्वजनिक किए जाने के आदेश के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली है। 

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पेपर्स को सार्वजनिक ना किया जाए

यूनिवर्सिटी का कहना है कि सरकार ने आदेश दिया है कि उसके आदेश के बिना इन पेपर्स को सार्वजनिक ना किया जाए। लोवनी का कहा है कि इसमें जरूर कुछ बहुत दिलचस्प है। उनका मनना है कि ये दस्तावेज शाही परिवार और भारत के विभाजन को लेकर कई राज खोल सकते हैं।

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