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राष्ट्रीय

भारत सरकार और केयर्न के बीच टैक्स विवाद गहराया, केयर्न 12000 करोड़ रुपये वसूलने को एयर इंडिया की संपत्ति सीज करेगी

Khaskhabar/ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी पीएलसी ने अमेरिकी अदालत में एक मुकदमा दाखिल किया है ताकि वह एयर इंडिया की विदेशी संपत्तियों को जब्त कर सके। केयर्न एनर्जी ने यह कदम भारत सरकार से 1.72 अरब डॉलर (करीब 12,600 करोड़ रुपये) के मुआवजे की वसूली के लिए उठाया है।

Khaskhabar/ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी पीएलसी ने अमेरिकी अदालत में एक मुकदमा दाखिल किया है ताकि वह एयर इंडिया की विदेशी संपत्तियों को जब्त कर सके। केयर्न एनर्जी ने यह कदम भारत सरकार से 1.72 अरब
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यह मुआवजा भारत सरकार की तरफ से केयर्न एनर्जी पर पुरानी तारीखों से लागू 10,427 करोड़ रुपये के कर की मांग के खिलाफ कंपनी की अपील पर एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने तय किया था।

अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा दायर

ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी पीएलसी (Cairn Energy) ने अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा दायर किया है। इस मुकदमे में अगर कंपनी का पक्ष स्वीकार कर लिया जाता है तो उसे एयर इंडिया (Air India) की विदेश स्थित संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिल सकता है। इनमें कंपनी के विमान समेत अन्य संपत्तियां शामिल हैं।

केयर्न एनर्जी को कुल 1.72 अरब डॉलर

एक अंतरराष्ट्रीय विवाद निपटान न्यायाधिकरण ने केयर्न एनर्जी और भारत सरकार के टैक्स विवाद मामले में कंपनी के पक्ष को सही ठहराया था। न्यायााधिकरण ने भारत सरकार को निर्देश दिया था कि वह केयर्न एनर्जी को कुल 1.72 अरब डॉलर (वर्तमान भाव पर 12,000 करोड़ रुपये से अधिक) लौटा दे। हालांकि, सरकार ने इस फैसले को अपने संप्रभु अधिकारों में दखल मानते हुए इसके खिलाफ अपील की है।

बांकेक गाइडलाइंस के तहत है केयर्न का दावा

इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े तीन सूत्रों ने बताया कि केयर्न ने न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिला अदालत में 14 मई को एक याचिका दायर कर एयर इंडिया की संपत्ति जब्त करने की इजाजत मांगी है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए अदालत में अधिवक्ताओं के एक दल को नियुक्त किया है।

शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रही

केयर्न का तर्क है कि एयर इंडिया पूरी तरह से भारत सरकार की कंपनी है और उसे कानूनी रूप से भारत की संपत्ति कहना गलत नहीं है। एक तरफ केयर्न का कहना है कि वह अपने शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रही है, क्योंकि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय विवाद निपटान न्यायाधिकरण के फैसले पर अमल नहीं कर रही है।

वहीं, भारत सरकार का कहना है कि उसे इस तरह के किसी भी गैरकानूनी फैसले के खिलाफ अपने हितों की रक्षा का अधिकार है। सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार या उसकी किसी भी सरकारी कंपनी को अभी इस बारे में कोई नोटिस नहीं मिला है।

कई देशों में मुकदमे दाखिल कर चुकी है केयर्न

केयर्न 21 दिसंबर के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को लेकर भारत के खिलाफ अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा, फ्रांस, सिंगापुर और तीन अन्य देशों की अदालतों में पहले ही मुकदमा दायर कर चुकी है।

इसके बाद भारत सरकार ने सरकारी बैंकों, तेल व गैस कंपनियों, शिपिंग कंपनियों, और विमानन कंपनी को अपनी विदेशी संपत्त्तियों को जब्त करने की कोशिश के खिलाफ सचेत रहने का निर्देश दिया था। साथ ही बैंकों को अपने विदेशी खातों में ज्यादा पैसे नहीं छोड़ने को भी कहा गया था। सरकार का कहना था कि बैंकों का पैसा सरकारी नहीं बल्कि जनता का होता है, इसलिए केयर्न उसे जब्त नहीं कर सकती।

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क्या है पूरा मामला

केयर्न ने 1994 में भारत के तेल व गैस क्षेत्र में निवेश किया था। एक दशक बाद कंपनी ने राजस्थान में बड़ा तेल भंडार खोजा था। साल 2006 में कंपनी ने अपनी भारतीय संपत्तियों को बीएसई में सूचीबद्ध कराया था। पांच साल बाद सरकार ने एक रेट्रोएक्टिव टैक्स कानून (पिछली तारीख से लागू कर का कानून) पारित किया था और इसके आधार पर केयर्न से अपने पुनर्गठन के लिए 10,247 करोड़ रुपये का कर मय ब्याज और जुर्माना अदा करने को कहा था।

केयर्न को 1.2 अरब डॉलर (करीब 8,800 करोड़ रुपये) का मुआवजा मुकदमे की लागत

इस कार्रवाई को हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसने पिछले दिसंबर में भारत सरकार के फैसले को खारिज करते हुए केयर्न को 1.2 अरब डॉलर (करीब 8,800 करोड़ रुपये) का मुआवजा मुकदमे की लागत व ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया था, जो कुल 1.72 अरब डॉलर (करीब 12,600 करोड़ रुपये) बैठता है।

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