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कृषि कानूनों पर SC की समिति से भूपेंद्र सिंह मान ने खुद को किया अलग, बोले- किसान हितों से नहीं कर सकता समझौता

Khaskhabar/नए कृषि कानूनों को लेकर बनी सुप्रीम कोर्ट की समिति में से एक सदस्‍य, भूपेंद्र सिंह मान ने खुद को अलग कर लिया है। मान भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्‍यक्ष हैं और वे इन तीनों कृषि कानूनों का समर्थन करते रहे हैं। हालांकि अब उन्‍होंने अपनी चिट्ठी में कहा है कि वे ‘पंजाब और किसानों के हितों के साथ समझौता न करने के लिए किसी भी पद का त्‍याग करने को तैयार हैं।’ उन्‍होंने पत्र में ‘किसान यूनियनों और जनता के बीच की भावनाओं और शंकाओं’ का भी हवाला दिया है।

Khaskhabar/नए कृषि कानूनों को लेकर बनी सुप्रीम कोर्ट की समिति में से एक सदस्‍य, भूपिंदर सिंह मान ने खुद को अलग कर लिया है। मान भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्‍यक्ष हैं और वे इन तीनों कृषि कानूनों का समर्थन करते रहे हैं। हालांकि अब उन्‍होंने अपनी चिट्ठी में कहा है कि वे 'पंजाब और किसानों के हितों के साथ
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कमेटी के सदस्‍यों में भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष भूपेंद्र सिंह मान (Bhupinder Singh Mann) भी थे. अब उन्होंने समिति से अपना नाम वापस ले लिया है. दरअसल कमेटी में भूपिंदर मान के नाम पर शुरुआत से ही बवाल हो रहा था.

हालांकि अब उन्‍होंने अपनी चिट्ठी में कहा है कि वे ‘पंजाब और किसानों के हितों के साथ समझौता न करने के लिए किसी भी पद का त्‍याग करने को तैयार हैं।’ उन्‍होंने पत्र में ‘किसान यूनियनों और जनता के बीच की भावनाओं और शंकाओं’ का भी हवाला दिया है।

Khaskhabar/नए कृषि कानूनों को लेकर बनी सुप्रीम कोर्ट की समिति में से एक सदस्‍य, भूपिंदर सिंह मान ने खुद को अलग कर लिया है। मान भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्‍यक्ष हैं और वे इन तीनों कृषि कानूनों का समर्थन करते रहे हैं। हालांकि अब उन्‍होंने अपनी चिट्ठी में कहा है कि वे 'पंजाब और किसानों के हितों के साथ
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मान ने लिखा है, “एक किसान और एक यूनियन नेता के तौर पर, किसान यूनियनों और जनता के बीच फैली शंकाओं को ध्‍यान में रखते हुए, मैं किसी भी पद का त्‍याग करने को तैयार हूं ताकि पंजाब और देश के किसानों के हितों के साथ समझौता न हो सके। मैं समिति से खुद को अलग कर रहा हूं और मैं हमेशा अपने किसानों और पंजाब के साथ खड़ा रहूंगा।”

कमिटी में और कौन-कौन है?

मान के खुद को अलग करने के बाद समिति में अब तीन सदस्‍य बचे हैं। इनमें अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के डॉ प्रमोद कुमार जोशी, कृषि अर्थशास्त्री तथा कृषि लागत और मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी, शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवत शामिल हैं।

दिसंबर में सरकार को लिखी थी चिट्ठी

पिछले महीने भूपेंद्र सिंह मान ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को एक खत लिखकर कुछ मांगें सामने रखी थीं। उन्‍होंने लिखा था, ‘हम उन कानूनों के पक्ष में सरकार का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं। हम जानते हैं कि उत्‍तरी भारत के कुछ हिस्‍सों में एवं विशेषकर दिल्‍ली में जारी किसान आंदोलन में शामिल कुछ तत्‍व इन कृषि कानूनों के बारे में किसानों में गलतफहमियां पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।’

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किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी को ठुकराया

किसान नेताओं ने समिति में शामिल अन्य नामों पर भा ऐतराज जताया था. शीर्ष अदालत की तरफ से बनाई गई चार सदस्यों की समिति में BKU के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष अनिल घनवत, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान दक्षिण एशिया के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं. अनिल घनवत ने मीडिया में लिखे अपने लेखों में किसान कानूनों के पक्ष में राय दी थी.

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