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Arun Jaitley:पूर्व कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद करते हुए ट्वीट किया

Khaskhabar/Arun Jaitley:आज देश के पूर्व कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली की पुण्यतिथि है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें याद करते हुए ट्वीट किया और लिखा कि दोस्त की बहुत याद आती है।ठीक एक साल पहले आज ही के दिन उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा था। जेटली की पहली पुण्यतिथि पर भाजपा नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

Yes, Minister: Arun Jaitley, the man who powered Force Modi
Posted by khaskhabar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई नेताओं ने उन्हें ट्वीट कर याद किया। पीएम मोदी ने कहा, मुझे अपने दोस्त की बहुत याद आती है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘इस दिन, पिछले साल हमने श्री अरुण जेटली जी को खो दिया था। मुझे अपने दोस्त की बहुत याद आती है। अरुण जी ने लगन से भारत की सेवा की। उनकी बुद्धि, कानूनी कौशल और व्यक्तित्व महान था।’

गृह मंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘अरुण जेटली जी एक उत्कृष्ट राजनीतिज्ञ, विपुल वक्ता और एक महान इंसान थे, जिनकी भारतीय राजनीति में कोई समानता नहीं थी। वह बहुआयामी और मित्रों के मित्र थे। जो हमेशा अपनी विशाल विरासत, परिवर्तनकारी दृष्टि और देशभक्ति के लिए याद किए जाएंगे।’

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर जेटली को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, ‘प्रखर नेता, विचारक, पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व वित्त मंत्री स्व. श्री अरुण जेटली जी की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन। राष्ट्र निर्माण में उनकी जनकल्याणकारी नीतियों एवं योजनाओं का अप्रतिम योगदान सदैव याद किया जाएगा।’

जेटली का निधन राजनीतिक जगत सहित देश के लिए एक झटके की तरह

जेटली का निधन राजनीतिक जगत सहित देश के लिए एक झटके की तरह था, क्योंकि निधन से कुछ महीनों पहले तक वह राजनीति में खासा सक्रिय थे। उनके वित्त मंत्री रहने के दौरान ही देश में जीएसटी लाया गया।

सादगी के लिए पहचाने जाते थे जेटली

देश के पूर्व वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली अपनी सादगी के लिए पहचाने जाते थे. जेटली की सादगी ऐसी थी कि अपनी भाषा शैली और अपने ज्ञान के बूते अच्छे-अच्छों को जीत लेते थे.जब उन्हें विनिवेश राज्य (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री नियुक्त किया गया, तो मंत्रालय को नव निर्मित किया गया. उन्हें जम्मू-कश्मीर सरकार के नामांकित व्यक्तियों और जुलाई 2002 में राज्यों में शक्तियों के विभाजन के मुद्दे पर अन्य समूहों के साथ चर्चा करने के लिए केंद्र सरकार के प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था. उन्होंने लोकसभा चुनाव कभी नहीं जीता.

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