After the decision to withdraw the agricultural law, the farming will run on the old track, the intervention of the arhtiyas will continue.
कारोबार

कृषि कानून वापसी के फैसले के बाद खेती बाड़ी पुरानी पटरी पर चलेगी,आढ़तियों का हस्तक्षेप रहेगा जारी

 Khaskhabar/यूं तो तीनों कृषि कानून फिलहाल लंबित ही थे लेकिन अब इनकी वापसी के फैसले के बाद यह तय हो गया है कि खेती बाड़ी पुरानी पटरी पर ही चलेगी। कृषि उत्पादों के व्यापार और जिंसों की अंतर्राज्यीय आवाजाही पर पहले वाले प्रतिबंध वाले प्रविधान लागू हो जाएंगे। स्थानीय मंडियों के कानून के मकड़जाल और आढ़तियों का हस्तक्षेप जारी रहेगा। कृषि क्षेत्र और किसानों के लाभ के मद्देनजर सुधार की प्रक्रिया थम गई, जिससे कृषि प्रसंस्करण उद्योग को धक्का लगेगा। 

Khaskhabar/यूं तो तीनों कृषि कानून फिलहाल लंबित ही थे लेकिन अब इनकी वापसी के फैसले के बाद यह तय हो गया है कि खेती बाड़ी पुरानी पटरी पर ही चलेगी। कृषि उत्पादों के व्यापार
Posted by khaskhabar

सरकारी मंडियों के साथ प्राइवेट मंडियों की स्थापना से कारोबार में प्रतिस्पर्धा का रास्ता खुल गया

घरेलू व्यापार के साथ जिंसों के निर्यात का प्रभावित होना तय है। हालांकि कृषि क्षेत्र में कानूनी सुधार की जिम्मेदारी अब राज्यों पर ज्यादा है।कृषि उपज की बिक्री के लिए सरकारी मंडियों के साथ प्राइवेट मंडियों की स्थापना से कारोबार में प्रतिस्पर्धा का रास्ता खुल गया था। इसके मद्देनजर देश में तकरीबन पांच सौ प्राइवेट कृषि मंडियों के खुलने के प्रस्ताव तैयार हो गए थे। सहकारी संगठन नैफेड ने दो सौ मंडियों की स्थापना का मसौदा तैयार कर काम शुरु कर दिया है। 

सरकार के इस फैसले से इन मंडियों का काम प्रभावित

आधा दर्जन कृषि मंडियों में काम चालू भी हो चुका है। नैफेड के एमडी संजीव चड्ढा ने कहा कि सरकार के इस फैसले से इन मंडियों का काम प्रभावित जरूर होगा, लेकिन मंडियों को बंद करने की नौबत नहीं आएगी। नई मंडियों की स्थापना के लिए सहकारी संस्थाओं को राज्यों के कानून के तहत लाइसेंस लेना पड़ सकता है। इससे नई मंडियों में आढ़तियों का प्रविधान भी करना पड़ेगा जिससे उनकी उपज की लागत में वृद्धि हो सकती है।

अधिसूचित मंडी में ही उपज को बेचने की अनुमति

कृषि सुधार वाले कानून की वापसी के फैसले से किसानों के लिए वही पुरानी मुश्किलें पेश आएंगी। किसानों को अपनी निर्धारित व अधिसूचित मंडी में ही उपज को बेचने की अनुमति होगी। वह न तो अपनी मंडी के दायरे से बाहर जाकर बेच सकता है और न ही कोई दूसरा खरीदार उसके खेत पर उपज की सीधी खरीद कर सकता है। इसके लिए उसे अतिरिक्त शुल्क की भुगतान करना होगा।

नए कानून में कृषि उपज की आवाजाही को पूर्णत: मुक्त कर दिया

पहले से लागू पुराने कानूनों के अनुसार किसान भी अपनी उपज को एक राज्य से दूसरे राज्य में बिना मंडी शुल्क चुकता किए नहीं ले जा सकते हैं। इससे उपज की लागत बढ़ जाएगी। नए कानून में कृषि उपज की आवाजाही को पूर्णत: मुक्त कर दिया था, जिससे किसान जहां चाहें वहां अपनी मर्जी से अपनी उपज को बेच सकता है। 

किसानों को अपनी निर्धारित व अधिसूचित मंडी में ही उपज को बेचने की अनुमति

कृषि सुधार वाले कानून की वापसी के फैसले से किसानों के लिए वही पुरानी मुश्किलें पेश आएंगी। किसानों को अपनी निर्धारित व अधिसूचित मंडी में ही उपज को बेचने की अनुमति होगी। वह न तो अपनी मंडी के दायरे से बाहर जाकर बेच सकता है और न ही कोई दूसरा खरीदार उसके खेत पर उपज की सीधी खरीद कर सकता है। इसके लिए उसे अतिरिक्त शुल्क की भुगतान करना होगा।

कृषि में कानूनी सुधार की वापसी के साथ ही पुराने कानून लागू हो जाएंगे

कानूनी सुधार में आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे को भी सीमित कर दिया गया था। जबकि पुराने कानून में राज्य सरकारें विभिन्न कृषि जिंसों के मूल्य बढ़ते ते ही उन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर देती हैं, जिससे किसानों को नुकसान होता है। अब कृषि में कानूनी सुधार की वापसी के साथ ही पुराने कानून लागू हो जाएंगे। जून 2020 में ये तीनों प्रमुख कृषि कानून अमल में आए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए इन्हें स्थगित कर दिया है।

यह भी पढ़े —NASA ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट की एक तस्वीर,खेतों में ‘फायर एक्टिविटी’कर रही दिल्ली की आबोहवा प्रदूषि

फूड सेक्टर की कंपनियों की सीधी मांग

माना जा रहा है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को गुणवत्तायुक्त कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ेगा। कांट्रैक्ट के प्रविधान से किसानों को जहां उनके खेत पर ही अच्छा मूल्य प्राप्त होता वहीं प्रसंस्करण इकाइयों को काफी सहूलियत होती। फूड सेक्टर की कंपनियों की सीधी मांग से जहां किसानों को अधिक लाभ होता वहीं कंपनियों को भी उचित मूल्य पर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त होती। 

और ज्यादा खबरे पढ़ने और जानने के लिए ,अब आप हमे सोशल मीडिया पर भी फॉलो कर सकते है –
ट्विटर पर फॉलो करने के लिए टाइप करे – @khas_khabar एवं न्यूज़ पढ़ने के लिए #khas_khabar फेसबुक पर फॉलो करने के लाइव आप हमारे पेज @socialkhabarlive को फॉलो कर सकते है|