Afghanistan's ambassador to India, military help will be needed in the near future
दुनिया

भारत में अफगानिस्तान के राजदूत,निकट भविष्य में सैन्य मदद की पड़ेगी जरूरत

Khaskhabar/अफगानिस्तान के अधिकांश इलाकों में तालिबान की तरफ से युद्ध जैसे हालात बना दिए गए हैं। हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। भारत की चिंता भी लाजिमी है, क्योंकि उसने वहां अरबों डालर की मदद भेजी है और वहां तालिबान का मजबूत होना भारत अपने रणनीतिक हितों के लिए सही नहीं मानता। 

Khaskhabar/अफगानिस्तान के अधिकांश इलाकों में तालिबान की तरफ से युद्ध जैसे हालात बना दिए गए हैं। हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। भारत की चिंता भी लाजिमी है

नई दिल्ली में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुंदजई ने विशेष संवाददाता जयप्रकाश रंजन के साथ अपने देश के हालात और भारत की भावी भूमिका के बारे में विस्तार से बात की। मामुंदजई नई दिल्ली में कार्यरत उन गिने-चुने विदेशी राजनयिकों में से हैं जो खुलकर हिंदी बोलते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी का किया एलान

 14 अप्रैल, 2021 को अमेरिकी राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी का एलान किया था और उसके बाद से तालिबान की तरफ से युद्ध जैसे हालात बनाने की पूरी कोशिश हो रही है। लगभग एक तिहाई इलाके में युद्ध की स्थिति है। 

आतंकवाद को मानने वाली शक्तियां एकजुट

इस बीच चार हजार लोगों की मौत हो चुकी है और तीन लाख लोग बेघर हो चुके हैं। कोरोना की वजह से आंतरिक हालात पहले ही खराब थे, अब और बुरा दौर चल रहा है। आतंकवाद को मानने वाली शक्तियां एकजुट हैं। तालिबान अकेला नहीं है, बल्कि उसके साथ 21 आतंकी संगठन और हैं, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद और अल-कायदा भी हैं। 

राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार जिम्मेदारी से अपनी जनता और देश को बचाने की कोशिश में है। हमें लगता है कि अमेरिका ने सेना वापसी में जल्दबाजी की है, उसे हमें और समय देना चाहिए था ताकि इस तरह की शक्तियों से मुकाबले के लिए और तैयार हो सकें।

बिजली की वहां के अस्पतालों और स्कूलों को भी जरूरत

नार्थ-ईस्ट के प्रांतों में तालिबान ने मध्ययुगीन प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं। आप संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट देखिए, इनके साथ के लोगों का रिकार्ड देखिए, इनकी सोच नहीं बदली है। अभी हाल में इन्होंने काबुल में विद्युत आपूर्ति लाइन को उड़ा दिया, यह भी नहीं सोचा कि इस बिजली की वहां के अस्पतालों और स्कूलों को भी जरूरत है। तालिबान बदला है, यह कहने वालों को पहले आम अफगानियों से बात करनी चाहिए। उनसे पूछना चाहिए कि वे तालिबान के बारे में क्या सोचते हैं।

सरकार पूरी तरह इस तरह की वार्ता के पक्ष में

अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए कई जगहों पर बात हो रही है। अभी जब मैं आपके सामने बैठा हूं, तब भी (बुधवार को) दुशांबे में कई देशों की बैठक हो रही है। दोहा में जल्द ही बैठक की तैयारी है। ईरान में भी इस बारे में प्रयास हो रहे हैं। हमारी सरकार पूरी तरह इस तरह की वार्ता के पक्ष में है, लेकिन तालिबान इसकी आड़ में ज्यादा समय लेने में लगा है, ताकि वह ज्यादा से ज्यादा इलाकों में युद्ध जैसे हालात बना सके। 

शांति के लिए उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही

अफगान सरकार के प्रतिनिधि दोहा में पिछले 10 महीनों से हैं, लेकिन बातचीत का नतीजा ऐसा नहीं है, जिसे हम उपलब्धि कह सकें। शांति के लिए उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है। दूसरी तरफ, तालिबान का एकमात्र मकसद यह है कि वह ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों में काबिज हो सके, ताकि बाद में दावा कर सके कि उसे ज्यादा समर्थन हासिल है।

हमें भारत से सैन्य मदद चाहिए

भारत को वहां अपनी सेना भेजने की जरूरत नहीं है, लेकिन एक साथ कई आतंकी संगठनों से लंबे समय तक लड़ने के लिए हमें हेलीकाप्टर, हथियार और दूसरे साजो-समान चाहिए। हमारे पास चार लाख सैनिकों की सेना है जो काफी सक्षम है।अभी भारत से सैन्य मदद की जरूरत नहीं है, क्योंकि अमेरिकी सेना की तरफ से कुछ साजो-समान और हथियार हमें मुहैया कराए गए हैं, लेकिन हो सकता है कि अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी के बाद यह मदद न मिले, तब हमें भारत से सैन्य मदद चाहिए। 

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पाकिस्तान के लिए भी खतरा होगा साबित

तालिबान पाकिस्तान के लिए भी खतरा साबित होगा। हम पाकिस्तान से आग्रह कर रहे हैं, उसका प्रभाव तालिबान पर सबसे ज्यादा है। इसलिए वह उन्हें शांति की राह पर आने के लिए समझाए। पाकिस्तान सरकार हमसे वादा भी करती है, लेकिन इसका कोई असर अभी तक देखने को नहीं मिला।

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