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11 एकड़ में खड़ी आलू की फसल को युवा किसान ने ट्रैक्टर चलाकर किया नष्ट, उचित दाम न मिलने से था नाराज

Khaskhabar/किसानों के अनुसार आलू की फसल पर करीब 60 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है. लेकिन जिस तरह से आलू के दाम औंधे मुंह गिरे हैं, इससे तो प्रति एकड़ 25000 रुपये का उन्हें नुकसान हो रहा है. बकौल, जसकीरत अगर वह ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़कर आलू मंडी पहुंचाते हैं तो नुकसान और बढ़ जाएगा.

Khaskhabar/किसानों के अनुसार आलू की फसल पर करीब 60 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है. लेकिन जिस तरह से आलू के दाम औंधे मुंह गिरे हैं, इससे तो प्रति एकड़ 25000 रुपये का उन्हें नुकसान हो रहा है. बकौल, जसकीरत अगर वह ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़कर आलू मंडी पहुंचाते हैं तो नुकसान और बढ़ जाएगा.
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उचित मूल्य नहीं मिलने से लागत भी नहीं निकल पा रही

उन्होंने बताया कि पंजाब के दोआबा क्षेत्र में आलू की अधिक पैदावार होती है. बावजूद इसके फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से लागत भी नहीं निकल पा रही है. इसे देखते हुए जसकीरत सिंह ने आलू की फसल को ट्रैक्टर से जोतवा दिया. बता दें, इससे पहले पंजाब में कई जगह किसानों ने गोभी की फसल भी उचित मूल्य न मिलने पर उजाड़ दी थी. बहुतों ने ले जाने का खर्च मिलने पर इन्हें गायों को खिलाने के लिए गोशालाओं में पहुंचा दिया था.

Khaskhabar/किसानों के अनुसार आलू की फसल पर करीब 60 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है. लेकिन जिस तरह से आलू के दाम औंधे मुंह गिरे हैं, इससे तो प्रति एकड़ 25000 रुपये का उन्हें नुकसान हो रहा है. बकौल, जसकीरत अगर वह ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़कर आलू मंडी पहुंचाते हैं तो नुकसान और बढ़ जाएगा.
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गोभी के बाद किसानों को आलू की फसल नष्ट

दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन को पंजाब के किसानों का भारी समर्थन हासिल हो रहा है. लेकिन इसी आंदोलन के चलते फसल का उचित मूल्य न मिलने से भी किसान परेशान हैं. गोभी के बाद किसानों को आलू की फसल नष्ट करनी पड़ रही है. इन्हीं हालात में कपूरथला के गांव गोसल निवासी युवा किसान जसकीरत सिंह ने आलू की अपनी 11 एकड़ फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिया.

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धान व गेहूं से भी एमएसपी हटा दिया गया

देश की राजधानी दिल्ली की सीमा स्थित सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसान 26 नवंबर से डेरा डाले हुए हैं। किसानों को आशंका है कि धान व गेहूं से भी एमएसपी हटा दिया गया तो वह भी दूसरी उन फसलों की तरह घाटे का सौदा होगी, जिनके दाम व्यापारी निर्धारित करता है। वहीं अलग-अलग सब्जियों के दाम ना मिलने पर किसानों को अपनी कई महीनों की मेहनत को खेतों में ही नष्ट करना पड़ रहा है। गोभी के बाद अब किसान आलू की फसल को भी खेतों में ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर रहा है।

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