धर्म

संतान सप्तमी:संतान की दीर्घायु व आयुष्य की कामना के लिए माताएं आज रहेंगी व्रत,जनिये मुहूर्त एवं पूजा विधि

Khaskhabar/संतान सप्तमी:संतान की दीर्घायु व आयुष्य की कामना का व्रत जीवत्पुत्रिका व्रत (जिउतिया) मंगलवार को है।उत्तर प्रदेश में इसे संतान सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन माताओं को जीवत्पुत्रिका व राजा जिमूतवाहन का पूजन षोडसोपचार विधि से पूर्ण निराहार रहकर करना चाहिए। इस व्रत को द्वापर के अंत में व्यासजी ने शोकाकुल स्त्रियों के दु:ख निवारण के लिए प्रकाशित किया।

संतान सप्तमी
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सप्तमी का महत्व

महर्षि गौतम से स्त्रियों ने प्रश्न किया कि उनके पुत्र किस व्रत से दीर्घायु होंगे। महर्षि ने कथा के माध्यम से जीवत्पुत्रिका व्रत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सूर्यवंश में पैदा हुए राजा जिमूतवाहन एक स्त्री के संतान की रक्षा के लिए गरुण को अपने शरीर के मांस खंड का दान कर दिए। गरुण प्रसन्न होकर स्वर्ग लोक से अमृत लाकर उन बच्चों के अस्थि समूहों पर बरसाए, जिन बच्चों का उन्होंने भक्षण किया था। वे सभी जीवित होकर दीर्घायु हो गए। उस दिन अश्रि्वन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। गरुण ने वरदान दिया कि जो स्त्री इस दिन जीवत्पुत्रिका की कुश की आकृति बनाकर पूजा करेगी, उसका सौभाग्य बढ़ेगा और वंश की वृद्धि होगी।

संतान सप्तमी
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कैसे करें पूजन

जीवत्पुत्रिका व्रत रहने वाली स्त्रियां व्रत के लिए निम्न संकल्प लें- अहं अमुकनाम्नी मम पुत्रस्य आरोग्य लाभ पूर्वक दीर्घायुषो सर्वविध कल्याणं च जीवत्पुत्रिका व्रतं करिष्ये। पुन: दिन भर निराहार रहें। दोपहर बाद या सायंकाल सोने, चांदी या सूत की बनी जीवत्पुत्रिका एवं राजा जिमूतवाहन की पूजा करें। जिमूतवाहन की प्रतिमा कुश की होनी चाहिए लेकिन वर्तमान समय में बरियार वृक्ष को उनका प्रतीक मानकर पूजन करने की परंपरा पूर्वाचल में है।

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जिउतिया की दुकानों के साथ ही सरपुतिया व चिचिहड़ा के दातून की दुकानें सजी

इसकी तैयारियां पूरी हो गई हैं। सोमवार को महानगर के अनेक चौराहों पर सड़क की पटरियों पर जिउतिया की दुकानों के साथ ही सरपुतिया व चिचिहड़ा के दातून की दुकानें सजी रहीं। जरूरत के मुताबिक महिलाओं ने खरीदारी की। संतान के निमित्त रहे जाने वाले इस व्रत को लेकर माताओं में उत्साह है।

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