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राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता का स्तर बेहद खराब:प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

Khaskhabar/राजधानी दिल्ली में हवा लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। प्रदुषण की वजह से हवा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है। दिल्ली धूंध के चादर में लिपट गया है। इन सब के बीच मौसम विभाग का कहना है कि करीब एक सप्ताह धूंध के चादर ऐसे हीं रहने वाला है।दिवाली तक हालात में सुधार नहीं होंगे। प्रदूषण का अहम कारण पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना है।

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दिल्ली-एनसीआर में आसमान में धुंध के कारण विजिबिलिटी काफी कम है। कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब जबकि कुछ इलाको में हवा का स्तर बेहद खराब श्रेणी में है।दिल्‍ली, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के कुछ इलाकों में एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स 400 से ज्‍यादा रिकॉर्ड किया गया. जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी माना जाता है।

इलाकों में हवा की गुणवत्ता का स्तर बेहद खराब है. कोरोना के बढ़ते केस और प्रदूषण के कणों से जहरीली होती हवा ने दिल्ली के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। प्रदूषण की वजह से आसमान में सुबह-शाम धुंध की चादर छाने लगी है।

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राजधानी:प्रदूषण बढ़ने की वजह से विजिबिलिटी कम हुई

दिल्‍ली के कई इलाकों में आज सुबह काफी धुंध छाई हुई थी जिसके कारण दृश्‍यता कम हो गई थी। आज दोपहर दिल्‍ली की वायु गुणवत्‍ता बहुत खराब श्रेणी में है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार आज दोपहर 12 बजे दिल्‍ली का वायु गुणवत्‍ता सूचकांक 396 दर्ज किया गया।

इसके साथ शांत हवा और कम तापमान जैसी परिकूल परिस्थितियों ने वायु गुणवत्‍ता को बहुत खराब और गंभीर स्थिति में धकेल दिया है। पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के एयर क्‍वालिटी अर्ली वार्निग सिस्‍टम के अनुसार कल पंजाब में पराली जलाने के चार हजार नौ सौ मामले देखे गए जो कि वायु गुणवत्‍ता को प्रभावित कर रहा है। दीवाली के दौरान वायु गुणवत्‍ता बहुत खराब और गंभीर स्थिति में रहने की संभावना है।

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ऑनलाइन परिचर्चा:ज्यादा धुएं वाले पटाखे फोड़ने से बचें : प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

सीईपीआरडी व मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ‘पटाखे के उपयोग व प्रदूषण’ विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा हुई। इसमें कहा दिवाली पर ज्यादा आवाज व ज्यादा धुएं वाले पटाखे फोड़ने से बचें। पटाखों में विस्फोटकों का नियमानुसार उपयोग करें। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिलीप वागेला ने दीवाली के दौरान 14 दिन तक की जाने वाली वायु व ध्वनि मापन व प्रदूषण स्तर की जानकारी दी।

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