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भारत को करीब 1.4 अरब डॉलर चुकाने का आदेश,केयर्न एनर्जी को पूर्व प्रभाव से कर मामले में मिली जीत

Khaskhabar/आयकर नियमों में बदलाव के जरिये पूर्व प्रभावी कर वसूलने के मामले में भारत सरकार को लगातार दूसरा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने 10,247 करोड़ रुपये के पूर्व प्रभावी कर मामले में ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी के पक्ष में फैसला सुनाया है और भारत सरकार को ब्याज और अदालती खर्च सहित करीब 10,500 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया है। हालांकि सरकार ने इस फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है। 

Khaskhabar/आयकर नियमों में बदलाव के जरिये पूर्व प्रभावी कर वसूलने के मामले में भारत सरकार को लगातार दूसरा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने 10,247 करोड़ रुपये के पूर्व प्रभावी कर मामले में ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी के पक्ष में फैसला सुनाया है और भारत सरकार को ब्याज और
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शेयर, लाभांश और टैक्स रिफंड को ब्याज व शुल्क सहित वापस करना होगा

केयर्न एनर्जी ने बताया कि यह आदेश तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण ने दिया है, जिसमें भारत सरकार की ओर से भी एक न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। मध्यस्थता अदालत ने 582 पेज के फैसले में माना कि केयर्न एनर्जी की भारतीय इकाई केयर्न्स इंडिया पर पूर्व प्रभावी कर लागू करते हुए 2006-07 के दौरान लगाया गया शुल्क नियमों के विपरीत है। भारत सरकार ब्रिटेन के साथ द्विपक्षीय निवेश सुरक्षा संधि के तहत इस कर वसूलने को जायज ठहराने में नाकाम रही है। लिहाजा उसे कंपनी के जब्त किए गए शेयर, लाभांश और टैक्स रिफंड को ब्याज व शुल्क सहित वापस करना होगा। कंपनी का दावा है कि यह कुल राशि करीब 10,500 करोड़ रुपये होगी। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कहा है कि फैसले का अध्ययन कर अगला कदम उठाया जाएगा। हालांकि, ऐसे आदेश में फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रावधान नहीं होता है। 

Khaskhabar/आयकर नियमों में बदलाव के जरिये पूर्व प्रभावी कर वसूलने के मामले में भारत सरकार को लगातार दूसरा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने 10,247 करोड़ रुपये के पूर्व प्रभावी कर मामले में ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी के पक्ष में फैसला सुनाया है और भारत सरकार को ब्याज और
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वोडाफोन से भी हार चुके हैं 22,100 करोड़ का केस

पूर्व प्रभावी कर मामले में सरकार के लिए यह तीन महीने में दूसरा झटका है। सितंबर माह में सरकार को वोडाफोन समूह से 22,100 करोड़ रुपये वसूलने के मामले में हार मिली थी। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने इस मामले में भी सरकार को 85 करोड़ रुपये कानूनी खर्च के अलावा ब्याज व शुल्क सहित राशि लौटाने को कहा है। हालांकि, 23 दिसंबर तक सरकार ने वोडाफोन को कोई राशि नहीं दी थी। वोडाफोन और केयर्न इंडिया के मामले पर विदेशी निवेशकों की भी निगाहें लगी हुई हैं।

सूत्रों ने कहा कि 20 करोड़ डॉलर के ब्याज और मामले को न्यायाधिकरण में ले जाने पर हुए खर्च के रूप में दो करोड़ डॉलर को मिलाकर भारत सरकार को कंपनी के पक्ष में कुल 1.4 अरब डॉलर (10,500 करोड़ रुपये) देने होंगे. सरकार के लिए पिछले तीन महीने में यह दूसरा झटका है. इससे पहले सितंबर में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने वोडाफोन समूह पर भारत द्वारा पूर्व प्रभाव से लगाए गए कर के खिलाफ फैसला सुनाया था.

वेदांत लिमिटेड में केयर्न की पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी

हालांकि, केयर्न एकमात्र ऐसी कंपनी थी, जिसके खिलाफ सरकार ने पूर्व प्रभाव से कर वसूलने की कार्रवाई की. न्यायाधिकरण में मामला लंबित रहने के दौरान सरकार ने वेदांत लिमिटेड में केयर्न की पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी, करीब 1,140 करोड़ रुपये का लाभांश जब्त कर लिया और करीब 1,590 करोड़ रुपये का कर रिफंड नहीं दिया. केयर्न एनर्जी के अलावा सरकार ने इसी तरह की कर मांग उसकी सहायक कंपनी केयर्न इंडिया (जो अब वेदांत लिमिटेड का हिस्सा है) से की.

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उचित मंच पर कानूनी कार्रवाई भी शामिल है

केयर्न इंडिया ने भी अलग मध्यस्थता मुकदमे के जरिए इस मांग को चुनौती दी है. पूरे मामले पर वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार फैसले का अध्ययन करेगी और इसके सभी पहलुओं पर वकीलों के साथ सलाह ली जाएगी. बयान में कहा गया, ‘‘इस परामर्श के बाद सरकार सभी विकल्पों पर विचार करेगी और आगे कार्रवाई के बारे में निर्णय लेगी, जिसमें उचित मंच पर कानूनी कार्रवाई भी शामिल है.” सूत्रों ने बताया कि सरकार ने अभी तक वोडाफोन मामले में न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती नहीं दी है और केयर्न मध्यस्थता फैसले के बाद इस पर जल्द कोई निर्णय किया जा सकता है.

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