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दिल्ली:कोर्ट ने कहा – हिंसा के दौरान कार्रवाई पुलिस का फर्ज,जामिया की याचिका खारिज

दिल्ली:साकेत कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की तरफ से पुलिस पर किए गए पथराव के बाद पुलिस की तरफ से की गई कार्रवाई के मामले में जामिया की तरफ से पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अपील को खारिज कर दिया।

साकेत कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अपील को खारिज कर दिया।
Posted by khaskhabar

कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 197 का हवाला देते हुए अपील खारिज की। जामिया की तरफ से दाखिल शिकायत पत्र में कहा गया था कि पुलिस बिना अनुमति विश्वविद्यालय परिसर में घुसी व वहां संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

याचिका में यूनिवर्सिटी ने पुलिस पर बिना अनुमित परिसर में दाखिल होने और छात्रों व सुरक्षा गार्डों पर हमला करने का आरोप लगाया था. घटना 15 दिंसबर 2019 की है जब यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर और अंदर हिंसा हो रही थी.दिल्ली की एक अदालत ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की उसके परिसर में बिना अनुमति के दाखिल होने और छात्रों व सुरक्षा गार्डों पर हमला करने के आरोप में दिल्ली पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध करने वाली याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया.

यह मामला नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ दिसंबर 2019 में एक प्रदर्शन के दौरान का है. मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रजत गोयल ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की ओर से किया गया कृत्य कर्तव्यों के दायरे में आता हैं और उन पर मुकदमा चलाने के लिए संबंधित अधिकारियों से जरूरी मंजूरी लेनी होगी.

कोर्ट ने इसलिए खारिज की याचिका

अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा तय कानून के अनुसार, अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने से पहले भी जरूरी मंजूरी होनी चाहिए. इसके मद्देनजर, मौजूदा आवेदन को मंजूरी बिना अनुमति नहीं दी जा सकती है. आवेदन में पुलिस अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की गुजारिश की गई थी और दावा किया गया था कि 15 दिसंबर 2019 को पुलिस अधिकारियों ने कई नियम तोड़े हैं जिसमें सार्वजनिक/विश्वविद्यालय की संपत्ति में तोड़फोड़ करना और असहाय छात्रों पर बल का गैर जरूरी इस्तेमाल करना शामिल है. ये छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे.

विश्वविद्यालय की सिविल सोसाइटी सीएए कानून के खिलाफ एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन

यूनिवर्सिटी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि 15 दिंसबर 2019 को विश्वविद्यालय की सिविल सोसाइटी सीएए कानून के खिलाफ एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थी. तभी भीड़ को हटाने के नाम पर पुलिस अधिकारी यूनिवर्सिटी कैंपस में घुस आए और छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट की. याचिका में कहा गया है कि घटना के दौरान पुलिस ने यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ की और साथ ही आंसू गैंस के गोले दागे. यूनिवर्सिटी ने पुलिस पर बिना कारण लाठी चार्ज करने का भी आरोप लगाया है. यूनिवर्सिटी ने कहा कि पुलिस द्वारा मामसे में कोई कार्रवाई नही कि गई है और कोर्ट से मामले में जांच करने के लिए कहा गया है.