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चांद की सतह के नमूने लेकर पृथ्वी पर लौट रहा है चीनी कैप्सूल तीन दिन में करेगा लैंड, 40 साल बाद मिलेगी ऐसी सफलता

Khaskhabar/चीन के एक अंतरिक्ष कैप्सूल ने चांद की सतह से पत्थरों के नमूने लेकर पृथ्वी की ओर लौटना शुरू कर दिया है। इस तरह का प्रयास करीब 45 वर्षों में पहली बार किया जा रहा है। चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि चांग ई-5 अंतरिक्ष यान करीब 22 मिनट तक चार इंजनों को चालू करके रविवार सुबह चंद्रमा की कक्षा से निकला।

तीन दिन में धरती पर लैंड करेगा चीन का स्पेसक्राफ्ट

Khaskhabar/चीन के एक अंतरिक्ष कैप्सूल ने चांद की सतह से पत्थरों के नमूने लेकर पृथ्वी की ओर लौटना शुरू कर दिया है। इस तरह का प्रयास करीब 45 वर्षों में पहली
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यह अंतरिक्षयान इस महीने की शुरुआत में चांद पर पहुंचा था और उसने करीब दो किलोग्राम नमूने एकत्र किए। कैप्सूल के तीन दिन की यात्रा के बाद इनर मंगोलिया क्षेत्र में उतरने की संभावना है। चांग ई-5 चीन के अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास का सबसे अधिक जटिल एवं चुनौतीपूर्ण अभियान है। यह बीते 40 वर्ष से भी अधिक समय में दुनिया का पहला ऐसा अभियान है जिसमें चांद के नमूने धरती पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस महिला साइंटिस्ट की ‘मून मिशन’ में बड़ी भूमिका

ड्रैगन के सफल मून मिशन के पीछे 24 साल की स्पेस साइंटिस्ट झोउ चेंगयु की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। खुद चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने ट्वीट कर झोउ चेंगयु की तारीफ की है। स्पेस साइंटिस्ट झोउ चेंगयु चीन के आठवें सबसे बड़े जातीय समूह तुजिया से आती हैं। चांग-ई-5 के प्रक्षेपण स्थल वेनचांग स्पेसक्राफ्ट लॉन्च साइट पर सबसे कम उम्र के कमांडर होने के बावजूद उन्हें सम्मान के तौर पर बिग सिस्टर के रूप में जाना जाता था। वह रॉकेट कनेक्टर सिस्टम की कमांडर थीं। किसी भी रॉकेट की लॉन्चिंग के दौरान इस सिस्टम के कमांडर की बड़ी भूमिका होती है।

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चांग ई-5 ने चांद पर फहराया था चीनी झंडा

पिछले गुरुवार को चीन के अंतरिक्षयान चांग ई-5 के एस्केंडर ने चंद्रमा की सतह से टेक ऑफ के ठीक पहले कपड़े से बने चीन के राष्ट्रीय ध्वज को चंद्रमा की सतह पर फहराया था। बता दें कि चांग ई-5 चंद्रमा की सतह पर पहुंचने वाला चीन का तीसरा अंतरिक्षयान है। इससे पहले भी चीन सफलतापूर्वक चांद पर दो स्पेसक्राफ्ट्स को उतार चुका है। हालांकि, चीन पहली बार अपने किसी स्पेसक्राफ्ट को वहां से वापस लाने की कोशिश में है।

चीन के सबसे शक्तिशाली रॉकेट से लॉन्च हुआ था मिशन

चीनी मिशन अगर सफलतापूर्वक धरती पर वापस पहुंच जाता है तो उसकी चंद्रमा के बारे में समझ बढ़ेगी और इससे उसे चंद्रमा पर बस्तियां बसाने में मदद मिलेगी। चीन के अंतरिक्ष यान को चांद तक पहुंचाने के लिए लांग मार्च-5 रॉकेट का इस्‍तेमाल किया गया है। यह रॉकेट तरल केरोसिन और तरल ऑक्‍सीजन की मदद से चलता है। चीन का यह महाशक्तिशाली रॉकेट 187 फुट लंबा और 870 टन वजनी है।

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44 साल बाद चंद्रमा से नमूना लाएगा कोई अंतरिक्षयान

चंद्रमा की सतह पर 44 साल बाद ऐसा कोई अंतरिक्षयान उतरा है जो यहां से नमूना लेकर वापस लौटेगा। इससे पहले रूस का लूना 24 मिशन 22 अगस्त 1976 को चांद की सतह पर उतरा था। तब लूना अपने साथ चांद से 200 ग्राम मिट्टी लेकर वापस लौटा था। जबकि, चीन का यह स्पेसक्राफ्ट अपने साथ 2 किलोग्राम मिट्टी लेकर वापस आएगा।

चीन के दो मिशन चांद की सतह पर पहले से ही मौजूद हैं। इसमें चेंग-ई-3 नाम का स्पेसक्राफ्ट 2013 में चांद के सतह पर पहुंचा था। जबकि जनवरी 2019 में चेंग-ई-4 चांद की सतह पर लैंडर और यूटू-2 रोवर के साथ लैंड किया था। बताया जा रहा है कि ये मिशन अब भी एक्टिव हैं।

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