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घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी में भारत, धीरे-धीरे चीनी कंपनियों को करेगी बाजार से बाहर

khaskhabar/घरेलू मैन्युफैक्चरिंग:लद्दाख में भारतीय सैनिकों के साथ खूनी भिड़ंत के दो महीने से ज्‍यादा होने के बाद भी चीन के साथ सीमा पर अब भी तनाव बना हुआ है। ऐसे में भारत ने चीन से निप‍टने के हर प्रकार की तैयारी की है, चाहे वह सामरिक मोर्च पर हो, आर्थिक मोर्च पर हो या अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर।

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भारत के कुल आयात में चीन की हिस्‍सेदारी लगभग 14 फीसदी है। चीन से भारत मुख्य रूप से मोबाइल फोन, टेलीकॉम, पावर, प्‍लास्टिक के खिलौने और फार्मा इन्‍ग्रेडिएंट्स का आयात करता है। इस आयात को कम करने की कोशिश की जा रही है। भारत सरकार ने चीनी कंपनियों को एक के बाद एक कई झटके देने की तैयारी की है।

8000 से अधिक आइटमों की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी में भारत

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एमएसएमई (छोटे, लघु और मझोले उद्योग) मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक भारत चीन से 8,000 से अधिक आइटम का आयात करता है। चीन से आने वाले कई ऐसे आइटम हैं, जिनकी मैन्युफैक्चरिंग भारत में आसानी से की जा सकती है, लेकिन उद्यमियों की तरफ से सार्थक कोशिश नहीं की गई।

चीन से आने वाले छोटे आइटम चिन्हित किए जा रहे हैं। इन वस्तुओं का उत्पादन भारत में शुरू करवाने के लिए मशीन की खरीदारी एवं फिनिशिंग में चीन के समतुल्य लाने के लिए ऑटोमेशन में उद्यमियों की मदद सरकार की तरफ से की जा सकती है।

44 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के निर्माण के लिए टेंडर निरस्‍त

रेलवे ने 44 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के निर्माण के लिए निकाली गई निविदा को निरस्त कर दिया है। पिछले वर्ष इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई की तरफ से निकाली गई इस निविदा में कुल छह कंपनियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें एक चीनी संयुक्त उपक्रम भी शामिल था।

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भारतीय बाजारों से चीनी उत्पाद हुए काफी कम

चीन से तनाव के बाद बाजार में चीनी मोबाइल से लेकर अन्य उत्पादों की बिक्री काफी कम हो गई है। बिहार में हर महीने चीन से करीब 600 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, जो तेजी से सिमट रहा है। दिल्ली के व्यापारियों ने भी चीनी सामान का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अनुसार दीपावली पर केवल दिल्ली में चीन से 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का सामान भारतीय बाजारों में पहुंचता है। पूरे देश में दिवाली पर चीन से करीब एक लाख करोड़ रुपये का सामान आता है।

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