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ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड का मुख्यालय होगा स्थापित, 4 नई फ़ैक्ट्री लगेंगी

Khaskhabar/ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड का मुख्यालय स्थापित होगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अधिकारियों को मुख्यालय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चमोली के जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि जल्द भूमि की तलाश करें। उन्होंने प्रदेश में चार नई चाय फैक्ट्रियां स्थापित करने की भी घोषणा की।

Khaskhabar/ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड का मुख्यालय स्थापित होगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अधिकारियों को मुख्यालय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
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सरकारी आवास में चाय विकास बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे

मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास में चाय विकास बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कई अहम निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए राज्य में चार नई फैक्ट्रियां स्थापित की जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चाय बागानों से उत्पादित हरी पत्तियों के न्यूनतम विक्रय मूल्य को निर्धारित करने के लिए एक समिति भी गठित की जाए। यह समिति प्रत्येक वर्ष के लिए न्यूनतम विक्रय मूल्य निर्धारित करेगी। उन्होंने कहा कि न्यूनतम विक्रय मूल्य फार्मगेट मूल्य होना चाहिए।

Image: Tea gardens will be built in Gairsain
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मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय विकास बोर्ड की बैठक वर्ष में चार बार आयोजित की जाए। इससे बोर्ड और किसानों की समस्याओं को जानने के अधिक अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार प्रदेश के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने के प्रयास कर रही है। राज्य में टी गार्डन पर्यटन के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए टी टूरिज्म पर भी फोकस करने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड अब तक विभिन्न स्थानों कुल 1387 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर चाय प्लांटेशन कर चुका है।

लगभग चार हजार श्रमिक कार्यनियोजित किए गए

बोर्ड द्वारा वर्तमान में राज्‍य के नौ पर्वतीय जिलों (बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी) के 28 विकास खंडों में स्वयं संचालित योजना, स्पेशल कंपोनेंट प्लान, मनरेगा के अंतर्गत चाय विकास कार्यक्रम संचालित कर 1387 हेक्टेयर भूमि में 3,882 काश्तकार से और राजकीय व गैर राजकीय भूमि को लीज पर लेकर चाय प्लांटेशन किया जा चुका है। इसमें लगभग चार हजार श्रमिक कार्यनियोजित किए गए, जिसमें 70 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।

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चाय की मांग बोर्ड को उपलब्ध कराने के आदेश जारी

बैठक में बताया गया कि वर्तमान में बोर्ड द्वारा निर्मित चाय को उत्तराखंड टी ब्रांड नेम से रजिस्‍टर करते हुए बेचा जा रहा है। बोर्ड द्वारा जैविक, अजैविक आर्थोडोक्स ब्लैक व ग्रीन टी तैयार कर स्थानीय स्तर पर स्वयं के शोरूम, दुकानदारों, पोस्टल सेवा एवं कोलकाता ऑक्‍शन हाउस के माध्यम से बिक्री की जा रही है। चाय की बिक्री बढ़ाने व अधिक प्रचार-प्रसार के लिए शासन स्तर से शासकीय कैंटीनों व अन्य संस्थानों को चाय की मांग बोर्ड को उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। बेठक में उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल, उपाध्यक्ष चाय विकास बोर्ड गोविंद सिंह पिल्खवाल, अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव आनंद वर्धन एवं सचिव उद्यान हरबंस सिंह चुघ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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