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कोरोना संकट के बीच जानिए कैसे होगा विघ्नहर्ता का स्वागत, शुभ मुहूर्त पूजा की विधि

‘आजकल पूरे विश्‍व में कोरोना महामारी के कारण सर्वत्र ही लोगों के बाहर निकलने पर अनेक बंधन लगे हैं । कोरोना जैसे संकटकाल की पृष्ठभूमि पर हिन्दू धर्म में धर्माचरण के शास्त्र में कुछ विकल्प बताए हैं, जिन्हें ‘आपद्धर्म’ कहा जाता है । ‘आपद्धर्म’ का अर्थ ‘आपदि कर्तव्यो धर्मः ।’ अर्थात ‘संकटकाल में धर्मशास्त्रसम्मत कृत्य’ ।

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इसी अवधि में श्री गणेशचतुर्थी का व्रत तथा गणेशोत्सव को कैसे मनाना चाह‍िए, गणेशचतुर्थी का व्रत किस प्रकार करना चाहिए ? इस पर व‍िचार करना होगा।

गणेशोत्सव हिन्दुओं का बहुत बड़ा त्योहार है। श्री गणेशचतुर्थी के दिन साथ ही गणेशोत्सव के दिनों में पृथ्वी पर गणेशतत्त्व सामान्य दिनों की तुलना में सहस्र गुना कार्यरत होता है । आजकल कोरोना महामारी का प्रकोप प्रतिदिन बढ रहा है; इसके कारण कुछ स्थानों पर घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध हैं । इस दृष्टि से आपद्धर्म और धर्मशास्त्र का मेल कर जीवंत दृश्य, सजावट आदि न कर सादगीयुक्त पद्धति से पार्थिव सिद्धिविनायक का व्रत किया जा सकता है ।

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प्रतिवर्ष कई घरों में खडिया मिट्टी, प्लास्टर ऑफ पैरिस आदि से बनाई जानेवाली मूर्ति की पूजा की जाती है । इस वर्ष जिन क्षेत्रों में कोरोना विषाणु का प्रकोप अल्प है अर्थात जिस क्षेत्र में यातायात बंदी नहीं है, ऐसे स्थानों पर सामान्य की भांति गणेशमूर्ति लाकर उसकी पूजा करें । (‘धर्मशास्त्र के अनुसार गणेशमूर्ति खडिया मिट्टी की क्यों होनी चाहिए ?’, इस लेख के अंतिम सूत्र में इसका विवरण दिया गया है ।)

जिन लोगों को किसी कारणवाश घर से बाहर निकलना भी संभव नहीं है, उदा. कोरोना प्रकोप के कारण आसपास का परिसर अथवा इमारत को ‘प्रतिबंधजन्य क्षेत्र’ घोषित किया गया है, वहां के लोग ‘गणेशतत्त्व का लाभ मिले’, इसके लिए घर में स्थित गणेशमूर्ति की पूजा अथवा गणेशजी के चित्र का षोडशोपचार पूजन कर सकते हैं । यह पूजन करते समय पूजा में समाहित ‘प्राणप्रतिष्ठा विधि’ नहीं करनी है, यह ध्यान में लेनेयोग्य महत्त्वपूर्ण सूत्र है ।

ज्येष्ठा गौरी व्रत किस प्रकार करें ?

कुछ घरों में भाद्रपद शुक्ल पक्ष अष्टमी के दिन ज्येष्ठा गौरी का पूजन किया जाता है । इसे कुछ घरों में खडियों के स्वरूप में, तो कुछ घरों में मुखौटे बनाकर उनकी पूजा की जाती है । जिन्हें प्रतिवर्ष की भांति खडिया मिट्टी अथवा मुखौटों के स्वरूप में उनकी पूजा करना संभव नहीं है, वे अपने घर में स्थित देवी की किसी मूर्ति अथवा चित्र की पूजा कर सकते हैं ।

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विशेष सूचना : गणेशमूर्ति लाते समय, साथ ही उसका विसर्जन करते समय घर के कुछ लोग ही जाएं । मूर्ति विसर्जन अपने घर के निटक के तालाब अथवा कुएं में करें । इस काल में भीड होने की संभावना होने से शासन द्वारा कोरोना के संदर्भ में दिए गए दिशानिर्देशों का अचूकता से पालन करना हम सभी का आद्यकर्तव्य है ।

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