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राष्ट्रीय

एक साथ बने थे देश के दो बड़े राज्य एक साथ हुई स्थापना ,महाराष्ट्र और गुजरात के विकास पर एक नज़र

Khaskhabar/1 मई, 1960 के भारत के दो बड़े राज्यों की एक साथ स्थापना हुई थी, गुजरात और महाराष्ट्र। भारत के स्वतंत्र होने के वक्त गुजरात और महाराष्ट्र दोनों मुंबई का हिस्सा थे। बॉम्बे से महाराष्ट्र और गुजरात बनने तक के सफर में कई परेशानियां आई। 1960 से पहले बॉम्बे में मराठी और गुजराती दोनों भाषाएं बोली जाती थी इसलिए लोगों ने अपनी-अपनी भाषा के आधार पर अलग-अलग राज्य की मांग उठानी शुरू कर दी।

Khaskhabar/1 मई, 1960 के भारत के दो बड़े राज्यों की एक साथ स्थापना हुई थी, गुजरात और महाराष्ट्र। भारत के स्वतंत्र होने के वक्त गुजरात और महाराष्ट्र दोनों मुंबई का हिस्सा थे। बॉम्बे से महाराष्ट्र और गुजरात बनने तक के सफर में कई
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राज्यों का स्थापना दिवस, गुजरात दिवस और महाराष्ट्र दिवस के नाम से मनाया

कई आंदोलन भी हुए और अंतत: 1 मई को बॉम्बे को बांटकर महाराष्ट्र और गुजरात की स्थापना की गई। क्योंकि बॉम्बे में अधिकतर मराठी बोलने वाले लोग थे इसलिए काफी तर्क-वितर्क के बाद इसे महाराष्ट्र की राजधानी बना दिया गया। इन दोनों राज्यों का स्थापना दिवस, गुजरात दिवस और महाराष्ट्र दिवस के नाम से मनाया जाता है।

राज्यों का 61वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा

2021 में इन दोनों राज्यों का 61वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। देश की अर्थव्यवस्था में इन दोनों राज्यों का बड़ा योगदान रहता है। गुजरात और महाराष्ट्र ने देश को कई लीडर दिए हैं। एक तरफ़ गुजरात ने देश को महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, सरदार पटेल, मोररजी देसाई, होमी भाभा, विक्रम साराभई, जमदेश जी टाटा, धीरूभाई अंबानी, नरेन्द्र मोदी, सुनीता विलियम्स जैसे व्यक्तित्व दिए तो दूसरी तरफ़ छत्रपति शिवाजी महाराज, बाबा साहेब अंबेडकर, लोकमान्य तिलक, सावरकर, बाला साहेब ठाकरे, अन्ना हज़ार, दादा साहेब फाल्के, लता मंगेशकर, सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर जैसे महान और प्रसिद्ध व्यक्तित्व महाराष्ट्र ने देश को दिए।

क्षेत्रफल की दृष्टि से महाराष्ट्र 3,07,613 किमी में फैला है और गुजरात का क्षेत्रफल 196,024 वर्ग किमी

महाराष्ट्र जहां क्षेत्रफल के आधार पर देश का तीसरा सबसे बड़ा प्रदेश बना, वहीं गुजरात 6वां बड़ा प्रदेश बनकर सामने आया। क्षेत्रफल की दृष्टि से महाराष्ट्र 3,07,613 किमी में फैला है और गुजरात का क्षेत्रफल 196,024 वर्ग किमी स्क्वायर है। इन दोनों राज्यों की सबसे बड़ी संपदा इनका समुद्र तट हैं जिसमें गुजरात राज्य महाराष्ट्र से काफी आगे है। महाराष्ट्र के पास 720 किमी का समुद्र तट है लेकिन गुजरात के पास 1600 किमी से भी अधिक समुद्री तट है।

देश के GDP में गुजरात का योगदान कई अन्य राज्यों से अधिक

महाराष्ट्र को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। वित्तीय वर्ष 2021 के स्टेट इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक देश की GDP में महाराष्ट्र ने 14.2% का योगदान दिया है। गुजरात में देश की केवल 5% जनसंख्या रहती है वाबजूद इसके देश के GDP में गुजरात का योगदान कई अन्य राज्यों से अधिक है। गुजरात का GDP में 8.5% योगदान है। महाराष्ट्र का GDP में योगदान तो गुजरात से अधिक है लेकिन GDP ग्रोथ रेट में गुजरात, महाराष्ट्र से आगे है। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात GDP ग्रोथ रेट 13.61 के साथ देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। वहीं महाराष्ट्र का GDP ग्रोथ रेट 10.87% है।

भारत का किराना और खाद्य बाजार विश्व स्तर पर 6 वां सबसे बड़ा

भारत की 58% जनसंख्या की जीवन कृषि पर आधारित है और 70% बिक्री के साथ, भारत का किराना और खाद्य बाजार विश्व स्तर पर 6 वां सबसे बड़ा है। कृषि और औद्योगिक उत्पादन में गुजरात का अहम योगदान है। “हरित क्रांति” में दूसरे स्थान पर आने वाले गुजरात ने कृषि विकास तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया है। गुजरात वह राज्य है जहां कृषि और उद्योग एक साथ समृद्ध हो रहे हैं। गुजरात और महाराष्ट्र की इनकम सोर्स में तीन अहम सेक्टर हैं। महाराष्ट्र की इनकम सोर्स में 13% कृषि, 31% मैन्युफैक्चरिंग और 56% सर्विस सेक्टर का योगदान है। वहीं गुजरात के इनकम सोर्स मे 19% कृषि, 45% मैन्युफैक्चरिंग और 36% सर्विस सेक्टर का योगदान है। गुजरात का सिंचाई क्षेत्र नर्मदा नहर के आगमन के साथ दोगुना हो गया है और परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। आज, मूंगफली उत्पादन में गुजरात 40% हिस्सेदारी के साथ देश में पहले स्थान पर है। कृषि महोत्सव, ड्रिप सिंचाई योजना, किसान कल्याण के 7 चरण, किसान सूर्योदय योजना जैसे विभिन्न किसान-उन्मुख योजनाओं के साथ कृषि विकास और किसानों की समृद्धि में अग्रणी है।

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गुजरात एफडीआई क्षेत्र में नंबर एक पर है और अप्रैल – दिसंबर 2020 के दौरान 1.55 लाख करोड़ रुपये

उद्योग के क्षेत्र में गुजरात भारत का सबसे तेज़ी से उभरता राज्य है। अपनी व्यापार अनुकूल नीतियों और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के वातावरण के साथ गुजरात भारत का औद्योगिक राज्य बन गया है। गुजरात एफडीआई क्षेत्र में नंबर एक पर है और अप्रैल – दिसंबर 2020 के दौरान 1.55 लाख करोड़ रुपये का सबसे अधिक विदेशी मुद्रा प्राप्त किया है। कोरोना महामारी में जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है ऐसे में पिछले साल जुलाई और सिंतबर में गुजरात ने विदेशी निवेश का रिकॉर्ड ब्रेक कर दिया। अप्रैल से जून 2020 तक करीबन 3055 करोड़ तक का निवेश अब 1.16 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। पिछले एक साल में 1.38 लाख करोड़ का विदेशी निवेश गुजरात में आया है। आज दुनियाभर के कई सर्वे और रिपोर्ट्स में गुजरात ‘गुजरात मॉडल’ की वजह से टॉप रैंकिग में आता है।

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